सितारगंज। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के अंतर्गत सितारगंज और शक्तिफार्म क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. के.के. अग्रवाल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शक्तिफार्म के सालों पुराने और खस्ताहाल हो चुके जर्जर भवनों को तत्काल गिराने (ध्वस्तीकरण) के लिखित आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही, उप जिला अस्पताल सितारगंज परिसर में बने पुराने और संदिग्ध भवनों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए उनका तकनीकी असेसमेंट (जांच) कराने की भी कमान सौंपी है।

🔴 स्वास्थ्य मंत्री और कैबिनेट मंत्री के औचक निरीक्षण के बाद हुआ बड़ा फैसला

इस बड़ी कार्रवाई की पृष्ठभूमि बीते 9 मई को तैयार हुई थी, जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने उप जिला अस्पताल सितारगंज और सीएचसी शक्तिफार्म का अचानक औचक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा भी उनके साथ मौजूद थे। मंत्री सौरभ बहुगुणा ने अस्पताल परिसर में सालों से खाली पड़े और जर्जर हो चुके इन पुराने सरकारी आवासों व भवनों से आम जनता को होने वाले खतरों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था और इन्हें जल्द से जल्द ध्वस्त करने की मांग की थी।

🔴 छतों और दीवारों से बना था खतरा, सीएमओ ने जारी किए कड़े निर्देश

निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई थी कि शक्तिफार्म अस्पताल परिसर में मौजूद कई पुराने भवनों की छतें और दीवारें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जो कभी भी ढह सकती हैं। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों, ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों और आसपास से गुजरने वाले स्थानीय राहगीरों की जान को चौबीसों घंटे बड़ा खतरा बना हुआ था। इसी खतरे को भांपते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने मौके पर ही सीएमओ को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में सीएमओ डॉ. के.के. अग्रवाल ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को विभागीय अपर अभियंता और संबंधित विभागों से तालमेल बिठाकर तुरंत मलबे और भवनों को हटाने (ध्वस्तीकरण) की समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

🔴 उप जिला अस्पताल के पुराने भवनों की वास्तविक स्थिति का होगा आंकलन

शक्तिफार्म में बुलडोजर चलने की तैयारी के साथ-साथ उप जिला अस्पताल सितारगंज के पुराने विंग के भवनों को लेकर भी सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया गया है। सीएमओ ने निर्देश दिए हैं कि इन पुरानी इमारतों की तकनीकी और ढांचागत मजबूती की बारीकी से जांच की जाए, ताकि यह तय किया जा सके कि इन्हें मरम्मत की जरूरत है या फिर इन्हें भी पूरी तरह गिराना सुरक्षित रहेगा। इधर, उप जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ये इमारतें लंबे समय से असुरक्षित थीं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उच्चाधिकारियों के निर्देशों और तय सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।


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