​पीलीभीतसितारगंज-बरेली नेशनल हाईवे निर्माण हेतु हुए भूमि अधिग्रहण में करोड़ों रुपये के बहुचर्चित घोटाले की जांच अब आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा ने तेज कर दी है। शासन द्वारा जांच की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद ईओडब्ल्यू ने इस मामले में पीलीभीत के दो निलंबित राजस्व निरीक्षकों (कानूनगो) और छह लेखपालों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया है। इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
​उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष हाईवे के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ था। जांच में सामने आया था कि पीलीभीत और बरेली के लोक निर्माण विभाग व राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया गया। इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने पूर्व में ही पीलीभीत के दो कानूनगो और छह लेखपालों सहित संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। अब मामले की तह तक जाने और दोषियों पर आर्थिक शिकंजा कसने के लिए ईओडब्ल्यू ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है।
​जांच एजेंसी द्वारा जारी किए गए नोटिस के तहत सभी आठों राजस्व कर्मियों को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराने होंगे। ईओडब्ल्यू इस बात की पड़ताल कर रही है कि भूमि की किस्म बदलकर या अपात्रों को लाभ पहुंचाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किस स्तर पर किया गया। माना जा रहा है कि राजस्व कर्मियों के बयानों के बाद इस घोटाले में शामिल कुछ बड़े चेहरों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं और जल्द ही कुछ बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *