सितारगंज (ऊधम सिंह नगर)। उप जिला चिकित्सालय सितारगंज में प्रसव के बाद रेफरल के खेल में हुई गर्भवती महिला की मौत के मामले में गठित उच्च स्तरीय जांच कमेटी की कार्यवाही फिलहाल टल गई है। सोमवार (25 मई 2026) को तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम मृतका के परिजनों के आधिकारिक बयान दर्ज करने सितारगंज पहुंचने वाली थी, लेकिन पीड़ित परिवार के अनुरोध पर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है। परिजनों ने प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित किया कि पूरा परिवार इस वक्त गहरे सदमे और शोक में डूबा हुआ है तथा मृतका के जरूरी संस्कार की तैयारियों में व्यस्त होने के कारण अभी बयान देने की मानसिक या शारीरिक स्थिति में नहीं है।

सीएमओ ने गठित की तीन सदस्यीय निष्पक्ष जांच कमेटी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. केके अग्रवाल ने इस बेहद संवेदनशील और दर्दनाक मामले को गंभीरता से लेते हुए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस निष्पक्ष जांच कमेटी में चिकित्सा जगत के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिसमें उप जिला चिकित्सालय काशीपुर के सीएमएस (CMS) डॉ. संदीप दीक्षित, प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता त्रिपाठी और सीनियर मेडिकल ऑफिसर (SMO) डॉ. सुधीर गुप्ता शामिल हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि प्रसूता की डिलीवरी और उसके बाद हालत बिगड़ने पर उसे रेफर किए जाने के दौरान चिकित्सा स्तर पर किसी भी प्रकार की घोर लापरवाही हुई है या नहीं, इसकी पूरी तरह निष्पक्षता से जांच की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच कमेटी की अंतिम विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर ही दोषी डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ सख्त से सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

आशा, एएनएम और सीएचओ से सीएमओ ने खुद की प्रारंभिक पूछताछ

भले ही परिजनों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया टल गई हो, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर विभागीय जांच सोमवार को ही शुरू हो गई। सितारगंज उप जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने मामले का विस्तृत अपडेट देते हुए बताया कि सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके अग्रवाल और जिला कार्यक्रम प्रबंधक हिमांशु ने स्वयं संयुक्त रूप से अस्पताल पहुंचकर मामले की प्रारंभिक जांच (Initial Investigation) पूरी की है। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने मृतका के क्षेत्र से जुड़ी आशा कार्यकर्ता (ASHA Worker), एएनएम (ANM) और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) को तलब किया। अधिकारियों ने इन स्वास्थ्य कर्मियों से प्रसूता के गर्भधारण (Pregnancy) के पूरे 9 महीनों के दौरान अस्पताल में समय-समय पर कराई गई सभी जांचों, दिए गए टीकों और पूर्व में किए गए इलाज के सभी मेडिकल रिकॉर्ड्स की बारीकी से जानकारी ली, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रसव से पहले महिला को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या थी या नहीं।

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