नयी दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस बजट को आम जनता के लिए “अत्यंत निराशाजनक” करार दिया है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों का कहना है कि इस बजट से देश के मध्यम वर्ग, युवाओं और किसानों को कुछ हासिल नहीं हुआ है।
“भाषण में पारदर्शिता का अभाव” – कांग्रेस
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वित्त मंत्री का बजट भाषण पूरी तरह से “अपारदर्शी” रहा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “यह बजट पूरी तरह से फीका और नीरस है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में प्रमुख कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन की जानकारी छिपा ली है।”
विपक्ष के हमले के 5 बड़े कारण:
- टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं: विपक्ष का तर्क है कि मध्यम वर्ग को टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने उन्हें ठेंगा दिखा दिया।
- महंगाई और बेरोजगारी पर चुप्पी: अखिलेश यादव (SP) और अन्य नेताओं ने कहा कि बजट में रोजगार सृजन का कोई ठोस रोडमैप नहीं है।
- MGNREGA का मुद्दा: विपक्ष ने नरेगा का नाम बदलने और बजटीय आवंटन में कथित कटौती पर भी सवाल उठाए हैं।
- राज्यों की अनदेखी: ममता बनर्जी (TMC) ने इसे “विजनलेस” बताते हुए आरोप लगाया कि बंगाल जैसे राज्यों की मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
- आंकड़ों की बाजीगरी: विपक्षी नेताओं ने इसे केवल आंकड़ों का खेल बताया है जिससे धरातल पर कोई बदलाव नहीं आएगा।
राहुल गांधी कल देंगे जवाब
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बजट भाषण के तुरंत बाद तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय संक्षिप्त में कहा कि वह इस पर अपना विस्तृत पक्ष कल संसद के पटल पर रखेंगे।
लोकपाल और CVC बजट पर कटाक्ष
विपक्ष ने लोकपाल के लिए मात्र 30 करोड़ रुपये के आवंटन पर भी चुटकी ली है। नेताओं का कहना है कि भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं के बजट में कटौती करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।