पीलीभीत (उत्तर प्रदेश)। धार्मिक मान्यताओं, अलौकिक रहस्यों और अटूट आस्था को समेटे पीलीभीत के गजरौला थाना क्षेत्र स्थित रिछोला का सीताराम आश्रम (सीताराम मंदिर) इन दिनों देशव्यापी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस पवित्र धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थापित वह अलौकिक शिवलिंग है, जो दिन के तीन अलग-अलग पहर में चमत्कारी रूप से अपना रंग बदलता है। इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बनने और महादेव का आशीर्वाद लेने के लिए पूरे सावन माह में, विशेषकर सोमवार को, यहाँ श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ रहा है।
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर से है सीधा संबंध
इस पवित्र शिवलिंग का इतिहास बेहद दिलचस्प और श्रद्धा से भरा है। रिछोला फार्म निवासी हरजिंदर सिंह कहलो इस दिव्य प्रतिमा को मध्य प्रदेश के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर से लेकर पीलीभीत आए थे।
सिद्ध संत बाबा मुगरिया दास ने की थी स्थापना, रात में हुई थी दिव्य हलचल
मंदिर के पुजारी सेवादास महाराज ने इसके ऐतिहासिक रहस्यों से पर्दा उठाते हुए बताया कि इस चमत्कारिक शिवलिंग की स्थापना क्षेत्र के महान सिद्ध संत ब्रह्मलीन बाबा मुगरिया दास द्वारा की गई थी। मान्यता है कि स्थापना की रात पूरे मंदिर परिसर में एक अनोखी और अलौकिक हलचल महसूस की गई थी। सिद्ध संत बाबा मुगरिया दास ने इस घटना को साक्षात भगवान शिव की प्रत्यक्ष कृपा और चमत्कारिक उपस्थिति से जोड़ा था। तब से लेकर आज तक, तीन पहर में रंग बदलने की यह अलौकिक परंपरा श्रद्धालुओं के बीच गहरी श्रद्धा और कौतूहल का विषय बनी हुई है।
मनोकामना पूर्ण होने का अटूट विश्वास
समय के साथ इस पावन धाम की महिमा अब दूर-दराज के राज्यों तक फैल चुकी है। स्थानीय ग्रामीणों और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि सीताराम आश्रम में जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी झोली पसारता है, भोलेनाथ उसकी हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं। सावन के इस पावन महीने में मंदिर परिसर चौबीसों घंटे अखंड भजन-कीर्तन, विशेष महाआरती और जलाभिषेक के साथ पूरी तरह शिवमय बना हुआ है।