पीलीभीत। जनपद में ईको-टूरिज्म की संभावनाओं को नया विस्तार देते हुए वन एवं वन्य जीव प्रभाग ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड’ (एक जिला-एक वेटलैंड) योजना के अंतर्गत बिलसंडा विकासखंड के गांव गौहनिया में ‘गौहनिया वेटलैंड परियोजना’ को विकसित करने का निर्णय लिया गया है। वन एवं वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डीके ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना का औपचारिक प्रस्ताव मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य जिले की प्राकृतिक आर्द्रभूमियों को संरक्षित करना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिलाना है।


​गौहनिया वेटलैंड परियोजना कई मायनों में अद्वितीय है। लगभग 18.95 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैली यह आर्द्र भूमि जैव विविधता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगी। इस स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ सारस की बड़ी संख्या में मौजूदगी है; हालिया गणना के दौरान यहाँ एक साथ 41 सारस देखे गए हैं, जो पर्यावरण प्रेमियों के लिए उत्साहजनक संकेत है। सारस के साथ-साथ किंगफिशर और विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का यहाँ जमावड़ा रहता है, जिससे यह स्थान भविष्य में पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं होगा।
​इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण आयाम जन-जागरूकता और शिक्षा भी है। वन विभाग ने स्थानीय बच्चों को स्कूल स्तर से ही वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत बच्चों को दूरबीन के माध्यम से पक्षियों का अवलोकन कराया जा रहा है और प्रोजेक्टर व पुस्तकों के माध्यम से उन्हें पारिस्थितिकी तंत्र की बारीकियां समझाई जा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस वेटलैंड के विकसित होने से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ पर्यटन का एक नया सर्किट तैयार होगा। इससे न केवल जिले में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *