नई दिल्ली | आज 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर ‘कर्तव्य पथ’ एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला ने केवल पुरुष कर्मियों वाली टुकड़ी का नेतृत्व कर मिसाल पेश की है।
राजौरी से कर्तव्य पथ तक का सफर
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की रहने वाली 26 वर्षीय सिमरन बाला ने सीआरपीएफ के 147 पुरुष जवानों के दस्ते का नेतृत्व किया। यह पहली बार है जब इस बल की पुरुषों वाली टुकड़ी की कमान किसी महिला अधिकारी के हाथ में दिखी। जब सिमरन बाला के नेतृत्व में यह दस्ता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने से गुजरा, तो पूरा कर्तव्य पथ तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
नारी शक्ति का सशक्त उदाहरण
सिमरन बाला की यह उपलब्धि भारतीय सुरक्षा बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता का जीवंत उदाहरण है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों की टुकड़ी का नेतृत्व करना यह दर्शाता है कि भारतीय सेना और अर्द्धसैनिक बलों में ‘जेंडर न्यूट्रल’ (लिंग तटस्थ) नेतृत्व को प्राथमिकता दी जा रही है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
अधिकारी: सहायक कमांडेंट सिमरन बाला (उम्र 26 वर्ष)।
मूल निवास: राजौरी, जम्मू-कश्मीर।
टुकड़ी: सीआरपीएफ के 147 पुरुष जवानों का दस्ता।
अवसर: 2026 की गणतंत्र दिवस परेड।
सिमरन बाला ने इस गौरवपूर्ण प्रदर्शन के जरिए न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए प्रेरणा का एक नया मानक स्थापित किया है।