आगरा | उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद अंतर्गत थाना ताजगंज क्षेत्र में हुई 8 वर्षीय मासूम बच्ची की जघन्य हत्या के मामले में पुलिस ने कड़ा न्याय सुनिश्चित किया है। शनिवार तड़के हुई एक पुलिस मुठभेड़ में 25,000 रुपये का इनामी मुख्य अभियुक्त सुनील मारा गया। इस कार्रवाई ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को एक बार फिर पुख्ता किया है।

क्या था पूरा मामला?
नवरात्रि के दौरान 24 मार्च को एक 8 वर्षीय मासूम बच्ची अचानक गायब हो गई थी। परिजनों की सूचना पर DCP City सैय्यद अली अब्बास के नेतृत्व में 12 टीमों ने तलाशी अभियान शुरू किया। अगले ही दिन दिल दहला देने वाला खुलासा हुआ, जब बच्ची का शव उसी के घर में किराए पर रह रहे उसके मुंह बोले चाचा सुनील के कमरे में रखे आटे के कनस्तर से बरामद हुआ। आरोपी और उसके परिजनों ने पुलिस को गुमराह करने की हर संभव कोशिश की थी।

मुठभेड़ का घटनाक्रम:
पुलिस टीमें लगातार फरार सुनील की तलाश में दबिश दे रही थीं। शनिवार रात्रि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसकी घेराबंदी की। खुद को घिरा देख शातिर अपराधी सुनील ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें एक उप-निरीक्षक (SI) घायल हो गए। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्यवाही की, जिसमें सुनील को गोली लगी। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस का संदेश:
आगरा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। घायल उप-निरीक्षक का उपचार जारी है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। इस एनकाउंटर के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।


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