रुद्रपुर/सितारगंज (ऊधमसिंह नगर)। दहेज की लालसा और समाज की संकीर्ण सोच ‘बेटी पैदा होने’ पर अपनी पत्नी को बेरहमी से प्रताड़ित कर मौत के घाट उतारने वाले एक कलयुगी पति को कानून ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। ऊधमसिंह नगर जनपद के तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश चन्द्र आर्य की अदालत ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित और कड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी पति को सात वर्ष के कठोर कारावास (कड़ी सजा) की सजा सुनाई है।
शादी के बाद से ही दहेज के लिए किया जा रहा था प्रताड़ित
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) लक्ष्मी नारायण पटवा ने इस कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के निवासी अमृत पाल ने सितारगंज थाने में अपनी बहन नेहा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मुकदमा दर्ज कराया था। नेहा का विवाह 14 मई 2017 को चूना भट्टी, सितारगंज निवासी हीरा लाल (पुत्र महेंद्र) के साथ संपन्न हुआ था। शादी के कुछ समय बाद से ही पति हीरा लाल, सास सोमवती, ससुर महेंद्र और ननदें कंचन व आरती उस पर अतिरिक्त दहेज लाने का मानसिक व शारीरिक दबाव बनाने लगे थे।
प्रसव के दिन ही नवजात बेटी के साथ सड़क पर तड़पने को किया था मजबूर
इस दुखद मामले का सबसे क्रूर और हृदयविदारक पहलू तब सामने आया जब नेहा ने फरवरी 2019 में एक बेटी को जन्म दिया। 2 फरवरी 2019 को डिलीवरी (प्रसव) होने के तुरंत बाद, ससुराल वालों ने बेटी पैदा होने और दहेज की मांग पूरी न होने के आक्रोश में आकर नेहा को बेरहमी से लाठी-डंडों से पीटा और गंभीर हालत में घर से बाहर निकाल दिया। नेहा नवजात बच्ची के साथ कड़ाके की ठंड में सड़क पर तड़पती रही, जिसे देखकर एक स्थानीय मुस्लिम महिला ने इंसानियत दिखाते हुए उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण 3 फरवरी 2019 को उसने दम तोड़ दिया। प्रसव के दौरान की गई यही बेरहम पिटाई नेहा की मौत की मुख्य वजह बनी थी।
18 गवाहों और अकाट्य तथ्यों के आधार पर पति हीरा लाल को मिली सजा
इस जघन्य मामले की विस्तृत सुनवाई तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश चन्द्र आर्य की अदालत में संपन्न हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी लक्ष्मी नारायण पटवा ने अदालत के सम्मुख 18 महत्वपूर्ण और मजबूत गवाह पेश किए। माननीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने, मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्यों का गहनता से परीक्षण करने के बाद मुख्य आरोपी पति हीरा लाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304B (दहेज हत्या) के तहत दोषी करार देते हुए 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने मृतका की सास, ससुर और ननदों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया। न्यायालय के इस फैसले ने समाज में बेटियों के प्रति क्रूरता और दहेज लोलुपों को एक बेहद कड़ा और वैधानिक संदेश दिया है।