रुद्रपुर। शैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद) रुद्रपुर के तत्वावधान में रक्षाबंधन एवं जन्यो-पुन्यो पर्व गंगापुर रोड स्थित शैल परिसर के श्री गोल्ज्यू मंदिर में धूमधाम और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से रक्षा सूत्र और जनेऊ को पवित्र करने के बाद उपस्थित लोगों को जनेऊ धारण कराया गया।

कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य कैलाश तिवारी, पं. सतीश लोहनी, पं. त्रिलोचन पनेरू एवं पं. गौरव लोहमी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से जनेऊ धारण किया।

जनेऊ और ऋषि तर्पण के महत्व की दी जानकारी

ज्योतिषाचार्य कैलाश तिवारी ने उपस्थित लोगों को जनेऊ के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि त्योहारों के माध्यम से मानव परमात्मा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करता है। इसी क्रम में श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन और ऋषि तर्पण का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि ऋषि तर्पण मुख्य रूप से जनेऊ बदलने का पर्व है। जनेऊ को 96 चक्र और 96 हजार ऋचाओं अर्थात दो लोकों का प्रतीक माना जाता है। इसके तीन सूत्र शरीर, वाणी और मन-मस्तिष्क को संयमित रखने के प्रतीक माने जाते हैं।

बच्चों को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने पर जोर

शैल परिषद के अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवाल ने कहा कि इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों को अवश्य शामिल करना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं को जान सके और संस्कारवान बन सके।

समिति के महामंत्री एडवोकेट दिवाकर पांडे ने कहा कि ऋषि तर्पण को नारायणी पूर्णिमा, श्रावणी पूर्णिमा और कजरी पूर्णिमा के नाम से भी श्रद्धा एवं सद्भाव के साथ मनाया जाता है। उत्तराखंड में यह पर्व मुख्य रूप से जन्यो-पुन्यो और ऋषि तर्पण के नाम से जाना जाता है।

बच्चों ने भी विधि-विधान से धारण किया जनेऊ

कार्यक्रम में शैल सांस्कृतिक समिति रुद्रपुर के पदाधिकारियों, सदस्यों और श्री गोल्ज्यू मंदिर के भक्तों ने भाग लिया। इस दौरान अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवाल, महामंत्री दिवाकर पांडे, कोषाध्यक्ष डी.के. दनाई, राजेंद्र बोरा, दिनेश बम, हरीश दनाई, मोहन उपाध्याय, राजेंद्र बलोदी, चंद्र बल्लभ घिंडियाल, सुदर्शन सिंह चौहान, त्रिभुवन जोशी, मुकुल उप्रेती, कैलाश जोशी, हर्षित दनाई और हार्दिक पाण्डेय सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

वहीं पियूष लोहनी, प्रांजय पांडे, तन्मय जोशी, प्रियाशू और कृष्णा भट्ट सहित कई बच्चों ने भी विधि-विधान से जनेऊ धारण किया। आयोजकों ने कहा कि बच्चों की सहभागिता से नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।

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