पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व से मानवीय संवेदना और ममता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है, जहां बिजनौर के जंगलों से अपनी मां से बिछड़ कर आया एक नन्हा हाथी का बच्चा अब न केवल सुरक्षित है, बल्कि अपनी चंचलता से सभी का मन मोह रहा है। करीब चार महीने की उम्र का हो चुका यह शावक टाइगर रिजर्व की टीम के विशेष लाड-प्यार और देखरेख के कारण मौत को मात देकर एक नई जिंदगी जी रहा है। कभी बेहद कमजोर हालत में यहाँ लाया गया यह नन्हा ‘गजराज’ आज फुटबॉल खेलता और मस्ती करता नजर आता है, जिसे देखकर टीम की मेहनत सफल होती दिखाई दे रही है।
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह के कुशल निर्देशन में महावत सुरेश और उनकी पूरी टीम इस मासूम शावक का ख्याल बिल्कुल एक मां की तरह रख रही है। शुरुआती दिनों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण इसे महज 14 लीटर लैक्टोजेन दूध दिया जाता था, लेकिन बेहतर देखभाल का ही परिणाम है कि अब इसकी डाइट बढ़कर 30 लीटर प्रतिदिन हो चुकी है। शारीरिक विकास और बेहतर पोषण सुनिश्चित करने के लिए अब उसे मुख्य आहार के साथ-साथ नाश्ते में दलिया और सत्तू भी दिया जा रहा है, जिससे उसकी सेहत में तेजी से सुधार हुआ है।

माला रेंज के जंगलों में पानी के साथ अठखेलियां करता यह स्वस्थ शावक अब इस क्षेत्र की नई पहचान बन रहा है। बाघों के कुनबे के लिए विश्व विख्यात पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने एक बेसहारा वन्यजीव को जीवनदान देकर संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है। यह मानवीय प्रयास सिद्ध करता है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व न केवल बाघों के लिए सुरक्षित बसेरा है, बल्कि संकट में फंसे अन्य वन्यजीवों के लिए भी एक ‘संजीवनी’ और जीवनदायिनी के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है।
(आधुनिक दुनिया को सभी स्थानों पर संवाददाताओं की आवश्यकता है। इच्छुक संपर्क करें- 8923815100 व्हाट्अप पर अपना नाम, स्थान, यदि कोई अनुभव है तो उसकी जानकारी और कहां से संवाददाता बनना चाहते हैं उस स्थान का नाम लिखें संपर्क करें। यदि आप पत्रकारिता सीखने के इच्छुक हैं, तो भी संपर्क कर सकते हैं।)