कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच ईवीएम (EVM) स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इस घटना ने राज्य में चुनावी सरगर्मी और तनाव को और बढ़ा दिया है।

10 बार स्ट्रॉन्गरूम खोलने का आरोप

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि स्ट्रॉन्गरूम को नियमों के विरुद्ध करीब 10 बार खोला गया। बीजेपी का तर्क है कि यह चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ खिलवाड़ है। पार्टी ने इस घटना को चुनाव में गड़बड़ी की गहरी साजिश से जोड़ते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

चुनाव आयोग का सख्त रुख: 6 निलंबित

मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन आयोग (EC) ने तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही की पुष्टि होने पर आयोग ने 6 संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि:

  • ईवीएम की सुरक्षा में रत्ती भर भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  • निष्पक्ष चुनाव कराना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
  • निलंबित अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है और विस्तृत जांच जारी है।

गरमाया राजनीतिक माहौल

इस मुद्दे पर बंगाल में सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहाँ बीजेपी इसे लोकतंत्र की हत्या बता रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। टीएमसी का कहना है कि हार के डर से विपक्ष ऐसे आरोप मढ़ रहा है।

सुरक्षा पर बढ़े सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद संवेदनशील बूथों और स्ट्रॉन्गरूम के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की चुनौती और बढ़ गई है। सभी की नजरें अब आयोग की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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