पीलीभीत। वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियों से निपटने के लिए शुक्रवार को प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आगाज हुआ। 13 से 14 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘वन्यजीव रेस्क्यू एवं संघर्ष की स्थिति में प्राथमिक प्रतिक्रिया’ रखा गया है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व और टीएसए फाउंडेशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में विशेष रूप से ‘बाघ मित्रों’ को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के पहले दिन का संचालन करते हुए टीएसए फाउंडेशन इंडिया के हर्षित सिंह ने मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में घबराहट से बचना और भीड़ पर नियंत्रण पाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। वन्यजीवों को उकसाने से रोकने और तुरंत वन विभाग को सूचित करने जैसे कदम उठाकर बड़ी जनहानि को टाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा घेरा (सेफ्टी कॉर्डन) बनाना और वैज्ञानिक तरीके से रेस्क्यू करना ही प्रभावी प्रबंधन का आधार है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने वन्यजीव संरक्षण को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के तकनीकी प्रशिक्षण से रेस्क्यू टीमों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है, जिससे न केवल वन्यजीवों को सुरक्षित बचाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय समुदायों का वन विभाग के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे यहाँ सीखे गए वैज्ञानिक तरीकों को फील्ड में पूरी संजीदगी के साथ लागू करें।
तकनीकी सत्र के दौरान वन्यजीव चिकित्सक डॉ. गोचलन ई. ने स्तनधारी जीवों के रेस्क्यू और तनाव प्रबंधन की बारीकियां सिखाईं, जबकि गोरखपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने वन्यजीवों की सुरक्षित पकड़ और हैंडलिंग के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। दोपहर के सत्र में डॉ. शैलेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को विभिन्न परिस्थितियों पर आधारित फील्ड अभ्यास भी कराया गया। वहीं, जयपुर से आए विशेषज्ञ उदय सैनी ने सांपों के रेस्क्यू और सर्पदंश की स्थिति में दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
प्रशिक्षण शिविर में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, रेस्क्यू टीम के सदस्य, विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार और बड़ी संख्या में बाघ मित्र उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, शनिवार को दूसरे दिन भी विभिन्न तकनीकी सत्रों और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों की क्षमता का विकास किया जाएगा।