-डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री-
पीलीभीत। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वन्यजीव प्रेमी और फोटोग्राफर डॉ. (प्रो.) जितेंद्र गोविंदानी के अनुसार, पीलीभीत टाइगर रिजर्व वर्तमान में तराई क्षेत्र के सभी जंगलों में प्रथम स्थान पर है। हाल ही में पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर उनकी कॉफी टेबल बुक को देश-विदेश में काफी सराहना मिल रही है। डॉ. गोविंदानी अब तक देश के विभिन्न टाइगर रिजर्व्स पर 11 कॉफी टेबल बुक्स तैयार कर चुके हैं और वर्तमान में कॉर्बेट नेशनल पार्क पर अपनी तीसरी पुस्तक पर कार्य कर रहे हैं।
पीलीभीत प्रवास के दौरान डॉ. गोविंदानी ने बताया कि यहाँ का प्राकृतिक आवास (हैबिटेट) अद्भुत और अद्वितीय है। उन्होंने कहा, “पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ-साथ अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की साइटिंग बहुत बेहतर हुई है, जो इसे अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती है।” हैदराबाद के एक विश्वविद्यालय में व्यवसाय प्रबंधन के प्रोफेसर के रूप में 30 वर्षों से अध्यापन कर रहे डॉ. गोविंदानी का जंगलों के प्रति गहरा लगाव ही उन्हें इस ओर खींच लाया।
कान्हा से शुरू हुआ सफर
डॉ. गोविंदानी ने बताया कि उनके इस सफर की प्रेरणा उन्हें कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से मिली। उन्हें महसूस हुआ कि पर्यटक अपने भ्रमण की यादों को संजोकर रखना चाहते हैं, जिसे पुस्तक का रूप दिया जा सकता है। कान्हा के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर डॉ. संजय कुमार शुक्ला के सहयोग से 2017 में कान्हा पर उनकी पहली कॉफी टेबल बुक प्रकाशित हुई। इसके बाद उन्होंने ‘टाइगर्स ऑफ कान्हा’ सहित बांधवगढ़, सतपुड़ा, पेंच (महाराष्ट्र) और कॉर्बेट पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर जोर
डॉ. गोविंदानी ने कहा कि पीलीभीत की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख टाइगर रिजर्व के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह पुस्तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रसिद्ध अभिनेत्री माधुरी दीक्षित तक भी पहुँची है, जिससे इस क्षेत्र के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। उनका लक्ष्य है कि कॉर्पोरेट सेक्टर इस कॉफी टेबल बुक के माध्यम से पीलीभीत के संसाधनों और पर्यटन विकास में सहयोग करे। उन्होंने सुझाव दिया कि पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय समुदाय को रोजगार से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर उन्होंने पीलीभीत के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह के सहयोग के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
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