​पीलीभीत। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों की अवहेलना कर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें संचालित करने के मामले में पीलीभीत के लिटिल एंजेल स्कूल पर बड़ी कार्रवाई की गई है। जिला शुल्क नियामक समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर विद्यालय पर एक लाख रुपये का अर्थदण्ड (जुर्माना) अधिरोपित किया है। जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार द्वारा पूर्व में स्कूल प्रबंधन व प्रधानाचार्य को निर्देशित किया गया था कि वे विद्यालय में केवल एनसीईआरटी (NCERT) की पुस्तकों का संचालन कराएं और अन्य प्रकाशकों की महंगी किताबों पर तुरंत रोक लगाएं। इसके बावजूद, विद्यालय द्वारा नियमों का उल्लंघन जारी रखा गया।
​मामले में प्रधानाचार्य द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण में कहा गया था कि सीबीएसई (CBSE) के दिशा-निर्देशों के अनुसार छात्रों के हित में पूरक अध्ययन सामग्री की व्यवस्था की गई है। हालांकि, जांच में यह बात सामने आई कि विद्यालय में अंग्रेजी व्याकरण की एक पुस्तक ₹300 में उपलब्ध कराई जा रही थी, जिस पर स्वयं विद्यालय का नाम अंकित था। इस पुस्तक के संचालन के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार या सीबीएसई बोर्ड से कोई अनुमति नहीं ली गई थी, जो कि सीधे तौर पर शासनादेश का घोर उल्लंघन है।
​अपर मुख्य सचिव, उ०प्र० शासन के पत्र और अधिनियम के प्राविधानों के तहत कार्रवाई करते हुए जिला शुल्क नियामक समिति ने यह जुर्माना लगाया है। प्रधानाचार्य को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर जुर्माने की धनराशि राजकोष के निर्धारित लेखा शीर्षक व मद में कोषागार चालान के माध्यम से जमा कराएं। यदि तय समय सीमा के भीतर यह राशि जमा नहीं की जाती है, तो विभागीय नियमों के तहत ब्याज सहित राजस्व वसूली की तरह कठोर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधक और प्रधानाचार्य की होगी।

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