नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल साइबर क्राइम टीम ने एक बड़े अंतर्राज्यीय (Inter-State) साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘इन्वेस्टमेंट ट्रेडिंग’ के नाम पर देशभर के मासूम लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहा था। जांच में अब तक 10.6 करोड़ रुपये के बड़े फ्रॉड का खुलासा हुआ है।
रांची से दबोचा गया मास्टरमाइंड, कई राज्यों में छापेमारी
साइबर सेल की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाया और अलग-अलग राज्यों में एक साथ छापेमारी (Raids) की। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता झारखंड की राजधानी रांची से मिली, जहाँ से इस पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड को दबोच लिया गया। पुलिस ने कुल 6 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है, जो अलग-अलग राज्यों से इस काले नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
फर्जी CBI और TRAI नोटिस का ‘खौफ’
यह गिरोह इतना शातिर था कि लोगों को डराने के लिए फर्जी CBI और TRAI के नोटिस भेजता था। हाल ही में एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर और फर्जी कानूनी नोटिस भेजकर गिरोह ने 20 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली थी। इसके अलावा, गिरोह लोगों को ‘हाई रिटर्न’ का लालच देकर फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए निवेश करवाता और फिर पैसा हड़प लेता था।
ठगी का ‘मॉडस ऑपरेंडी’ (तरीका):
- डिजिटल अरेस्ट: स्काइप या वीडियो कॉल के जरिए खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर घंटों तक लोगों को घर में ‘कैद’ (Digital Arrest) रखना।
- ट्रेडिंग स्कैम: व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा देना।
- फर्जी डॉक्यूमेंट्स: सरकारी एजेंसियों के लोगो (Logo) का इस्तेमाल कर जाली नोटिस तैयार करना।
दिल्ली पुलिस की अपील:
साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन कॉल या वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कार्रवाई नहीं करती। यदि कोई आपको इस तरह डराने की कोशिश करे या निवेश पर असामान्य रिटर्न का वादा करे, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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