ग़ाज़ियाबाद: दिल्ली से सटे ग़ाज़ियाबाद में पासपोर्ट बनाने के नाम पर चल रहे एक बड़े सिंडिकेट को पुलिस ने बेनकाब किया है। यहाँ तीन अलग-अलग गांवों के फर्जी पतों पर 22 पासपोर्ट जारी करा दिए गए, जबकि आवेदक कभी उन पतों पर रहे ही नहीं। इस मामले ने पासपोर्ट विभाग, स्थानीय पुलिस और LIU (Local Intelligence Unit) की वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल:
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों में हेराफेरी कर फर्जी पते तैयार किए थे। सबसे चौंकाने वाली भूमिका पोस्टमैन की रही। पोस्टमैन अरुण ने फर्जी पतों पर पासपोर्ट की डिलीवरी करने के बजाय, उन्हें सीधे गैंग के सदस्यों तक पहुँचा दिया।

गिरफ्तारी और आरोपी:
पुलिस ने इस मामले में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शामिल हैं:

  • विवेक गांधी, प्रकाश सुब्बा, अमनदीप और सतवंत (गैंग के मुख्य सदस्य)
  • अरुण (पोस्टमैन)

सिस्टम पर उठे सवाल:
इस फर्जीवाड़े ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पासपोर्ट जारी होने से पहले पुलिस और LIU घर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करती है, तो फिर फर्जी पते पर रिपोर्ट ‘ओके’ कैसे हो गई? क्या इस खेल में विभाग के अंदर के लोग भी शामिल हैं?

कड़ी कार्रवाई की तैयारी:
पुलिस अब उन सभी 22 पासपोर्ट को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। साथ ही, जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इन पासपोर्टों का इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया जाना था।

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