सितारगंज। बंदियों को आध्यात्मिकता से जोड़ने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से श्री राधा शरणम् सेवा समिति द्वारा केंद्रीय कारागार सितारगंज में राधानाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बंदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भक्ति रस का आनंद लिया।
रविवार को आयोजित संकीर्तन कार्यक्रम में भजन प्रवाहक कपिल भार्गव ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियां व्यक्ति को आत्ममंथन और आत्मसुधार का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय को सकारात्मक संकेत मानते हुए प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने कर्मों और परिस्थितियों के कारण किसी भी स्थिति में पहुंच सकता है, लेकिन भक्ति, सत्संग और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से वह अपने जीवन में परिवर्तन ला सकता है। गोस्वामी तुलसीदास के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने प्रभु भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। कठिन समय में ईश्वर का स्मरण मानसिक शक्ति और आत्मबल प्रदान करता है।
कपिल भार्गव ने बंदियों से नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने और भगवान के नाम का स्मरण करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान राधानाम संकीर्तन, भजन एवं सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया गया, जिससे पूरा कारागार परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
कई बंदियों ने इस तरह के आयोजनों को मानसिक शांति और आत्मिक सुकून देने वाला बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की इच्छा व्यक्त की। समिति के सदस्यों ने कहा कि तनाव, अवसाद और नकारात्मक सोच से जूझ रहे लोगों के लिए आध्यात्मिक गतिविधियां एक प्रभावी माध्यम साबित हो सकती हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए समिति ने केंद्रीय कारागार के अधीक्षक अनुराग मलिक का आभार व्यक्त किया। समिति ने भविष्य में जेलों, वृद्धाश्रमों और अन्य सामाजिक संस्थानों में भी ऐसे आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
इस अवसर पर ध्रुव बत्रा, तरुण कुमार, ऋषभ सिसौनिया, हरेंद्र सिंह सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।