रुद्रपुर। उत्तराखंड में फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए काशीपुर में हथियारों का जखीरा बरामद किया है। एसटीएफ और ऊधमसिंहनगर पुलिस के संयुक्त अभियान में एक स्विफ्ट कार से चार अवैध हथियार, 237 जिंदा कारतूस और सात फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए हैं मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

एसटीएफ के अनुसार मुख्यमंत्री के अपराध मुक्त उत्तराखंड विजन और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए शस्त्र लाइसेंसों की जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 4 जून को काशीपुर कोतवाली में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के संबंध में मुकदमा दर्ज किया गया था जांच के दौरान मंगलवार देर रात एसटीएफ को सूचना मिली कि काशीपुर के कटोराताल क्षेत्र में खड़ी एक स्विफ्ट कार में भारी मात्रा में अवैध हथियार रखे गए हैं। सूचना पर एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए वाहन को कब्जे में लिया। तलाशी के दौरान कार संख्या यूके 18 पी 5046 में से एक 12 बोर पम्प एक्शन बंदूक, एक .22 बोर सेमी ऑटोमैटिक राइफल, एक .32 बोर सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, एक .32 बोर रिवाल्वर, चार मैगजीन, 237 जिंदा कारतूस तथा सात कूटरचित शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए बरामद वाहन भी पुलिस ने सीज कर दिया है।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि राज्यभर में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों की जांच जारी है। अब तक तीन अभियोग दर्ज कर पांच आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है तथा कई अवैध हथियार और फर्जी लाइसेंस बरामद किए गए हैं उन्होंने चेतावनी दी फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार रखने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी साथ ही ऐसे लोगों को स्वेच्छा से अपने हथियार पुलिस के समक्ष सरेंडर करने का अवसर भी दिया गया है।आमतौर पर शांत और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाने जाने वाले काशीपुर क्षेत्र में इस तरह हथियारों का बड़ा जखीरा पकड़े जाने से स्थानीय जनता के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं और भय का माहौल है।उत्तराखंड का उधमसिंहनगर जिला उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता है यही कारण है कि स्थानीय पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियां भी एसटीएफ के साथ मिलकर इनपुट साझा कर रही हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना या आतंकी अपराधिक सांठगांठ को समय रहते पूरी तरह नेस्तनाबूद किया जा सके।

एसटीएफ अधिकारियों का आधिकारिक बयान इस पूरी रेड और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे एसटीएफ कुमांयू निरीक्षक एमपी सिंह और अरुण कुमार ने बताया कि टीम को इस संबंध में एक बेहद पुख्ता और गोपनीय इनपुट मिला था जिस पर बिना समय गंवाए त्वरित एक्शन लिया गया।एमपी सिंह कुमांयू निरीक्षक स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बताया कि अभी जांच बिल्कुल शुरुआती और संवेदनशील चरण में है। हम हथियारों के फॉरेंसिक विश्लेषण और कार के बैकग्राउंड डेटा को खंगाल रहे हैं कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं जिन पर काम किया जा रहा है जांच पूरी होते ही इस पूरे नेक्सस का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। देश और राज्य की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। काशीपुर में हुई एसटीएफ की इस बड़ी और सफल सर्जिकल स्ट्राइक को अवैध हथियारों के खिलाफ एक बहुत बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है,आने वाले दिनों में जैसे ही वाहन स्वामी और हथियारों के वैध या अवैध होने की स्थिति साफ होगी,इस मामले में कई बड़े नामों के बेनकाब होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

एसटीएफ के अनुसार बरामद हथियार, कारतूस, कथित फर्जी लाइसेंस और वाहन मुकदमे में नामजद सौरभ अग्रवाल, गौरव अग्रवाल पुत्रगण राकेश अग्रवाल तथा दीप्ति अग्रवाल पत्नी सौरभ अग्रवाल निवासी काशीपुर से संबंधित बताए जा रहे हैं। मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई में एसटीएफ के कुमांयू निरीक्षक एम.पी.सिंह, निरीक्षक अरुण कुमार, कांस्टेबल गुरवंत सिंह, कांस्टेबल मोहित वर्मा तथा कांस्टेबल सोनू पांडे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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