​पीलीभीत। प्रदेश में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर जिलों में तैनात अधिकारी गंभीर नहीं हैं। पीलीभीत में विभागों के जन सूचना अधिकारियों (पीआईओ) के साथ समीक्षा बैठक करने पहुंचे राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि आयोग के पास पहुंचने वाले करीब 75 प्रतिशत मामलों में सूचना तभी उपलब्ध कराई गई, जब आयोग ने स्वयं हस्तक्षेप किया। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि जिले के अधिकारी समयबद्ध तरीके से सूचनाएं उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहे हैं।
​समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों के ज्ञान की कलई उस समय खुल गई जब 100 से अधिक पीआईओ से ‘अपील’ और ‘शिकायत’ के बीच का अंतर पूछा गया, लेकिन अधिकांश अधिकारी इसका सही उत्तर नहीं दे सके। राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2019 में अधिनियम में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों की जानकारी वर्ष 2026 तक भी कई अधिकारियों को नहीं है। बैठक में यह भी सामने आया कि कई पीआईओ ‘डीम्ड पीआईओ’ और ‘सूचना के अंतरण’ (ट्रांसफर ऑफ इंफॉर्मेशन) जैसे बुनियादी प्रावधानों से पूरी तरह अनभिज्ञ थे। कई विभागों के अधिकारी बिना आवश्यक अभिलेखों के ही बैठक में पहुंच गए, जिससे विस्तृत समीक्षा कार्य प्रभावित हुआ।
​जिले की वर्तमान स्थिति साझा करते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि पीलीभीत में अब तक लापरवाही बरतने वाले 143 जन सूचना अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 58 मामले अभी भी लंबित हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि सरकारी वेबसाइटों पर ‘सुओ मोटू डिस्क्लोजर’ (स्वप्रकाशन) के तहत अनिवार्य सूचनाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों की समुचित जानकारी रखना अनिवार्य है। इस पत्रकार वार्ता के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार और जिला विकास अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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