चंडीगढ़। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी में हरियाणा राज्य सूचना आयोग के खर्चों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार आयोग ने पिछले 20 वर्षों में सूचना आयुक्तों और कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा अन्य संबंधित मदों पर 113.42 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं, जबकि इसी अवधि में RTI अधिनियम के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए मात्र 2.49 लाख रुपये खर्च किए गए।
आरटीआई कार्यकर्ता पी.पी. कपूर ने आयोग से प्राप्त सूचना के आधार पर यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर 2005 को हरियाणा में RTI अधिनियम लागू हुआ था और इसके 20 वर्ष पूरे होने के बावजूद आम लोगों को कानून के प्रति जागरूक करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले 15 वर्षों के दौरान RTI जागरूकता कार्यक्रमों पर कोई खर्च नहीं किया गया। इससे यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि सूचना के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आयोग ने कितनी गंभीरता दिखाई है।
पी.पी. कपूर ने कहा कि RTI अधिनियम का उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, लेकिन यदि नागरिकों को इसके अधिकारों और उपयोग की जानकारी ही नहीं होगी तो कानून का पूरा लाभ समाज तक नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने RTI तंत्र में जन-जागरूकता की कमी और खर्च के असंतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।