नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय का परिचय देते हुए दो वांछित भगोड़ों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सफलतापूर्वक प्रत्यर्पित (Extradite) कर भारत वापस लाया है। वापस लाए गए आरोपियों में आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह और कमलेश पारेख शामिल हैं।
इन गंभीर अपराधों में थी तलाश
दोनों आरोपियों पर देश के खिलाफ गंभीर आर्थिक और धोखाधड़ी के मामलों में शामिल होने का आरोप है:
- आलोक कुमार (मास्टरमाइंड): आलोक पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट हासिल करने, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। उसे एक ऐसे गिरोह का सरगना माना जा रहा है जो जाली पहचान के आधार पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने का अवैध नेटवर्क चलाता था।
- कमलेश पारेख (बैंकिंग फ्रॉड): कमलेश पारेख पर करोड़ों रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी का आरोप है। उसने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को सैकड़ों करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाया था।
इंटरपोल रेड नोटिस से मिला सुराग
CBI ने इन दोनों के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस (Interpol Red Notice) जारी करवाया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी तलाश तेज हो गई थी। इस नोटिस की मदद से UAE की सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें ट्रैक कर हिरासत में लिया। कानूनी और राजनयिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय समन्वय का परिणाम
CBI के प्रवक्ता के अनुसार, यह सफलता भारत और UAE के बीच मजबूत सुरक्षा संबंधों का परिणाम है। जांच एजेंसी अब इन दोनों से गहन पूछताछ करेगी ताकि उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पर्दाफाश किया जा सके।