कोलकाता। शनिवार को कोलकाता का ब्रिगेड परेड ग्राउंड एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना, जहाँ भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस समारोह ने राज्य में पहली बार भाजपा सरकार की नींव रखी। जहाँ एक ओर मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे दिग्गजों का जमावड़ा था, वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति सियासी गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी रही।

प्रोटोकॉल के तहत मिला था न्योता
लोकतांत्रिक परंपराओं और सरकारी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नई सरकार द्वारा ममता बनर्जी को शपथ ग्रहण समारोह का औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि एक स्वस्थ लोकतंत्र की मिसाल पेश करते हुए ममता बनर्जी इस समारोह में शामिल हो सकती थीं, लेकिन उन्होंने इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।

टीएमसी की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल
ममता बनर्जी की गैरमौजूदगी को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि चुनाव के दौरान रही कड़वाहट और सुवेंदु अधिकारी के साथ उनके व्यक्तिगत राजनीतिक टकराव के कारण उन्होंने समारोह में न आने का फैसला किया होगा।

सियासी मायने
ममता बनर्जी की अनुपस्थिति को भाजपा नेताओं ने जनता के जनादेश का अनादर बताया है, वहीं टीएमसी समर्थकों का मानना है कि यह विचारधारा की लड़ाई का संकेत है। भले ही ‘दीदी’ मंच पर नजर नहीं आईं, लेकिन सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बंगाल की सत्ता का केंद्र अब पूरी तरह बदल चुका है।


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