नई दिल्ली/वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ (अप्रैल 2026) रिपोर्ट ने वैश्विक आर्थिक मंच पर एक नई बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ वर्षों से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का खिताब संभालने वाला भारत अब एक पायदान नीचे खिसककर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इस ताजा रैंकिंग में यूनाइटेड किंगडम (UK) ने भारत को पीछे छोड़ते हुए पांचवां स्थान हासिल कर लिया है।
क्यों आई रैंकिंग में गिरावट?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का छठे स्थान पर खिसकना उसकी आर्थिक कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि मुद्रा के उतार-चढ़ाव (Currency Volatility) का परिणाम है।
- रुपये पर दबाव: ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। तेल के बढ़ते आयात बिल ने भारतीय रुपये को डॉलर के मुकाबले कमजोर किया, जिससे ‘नॉमिनल जीडीपी’ के डॉलर आंकड़ों में गिरावट दर्ज हुई।
- वैश्विक निवेश का रुख: भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशकों ने उभरते बाजारों से हाथ खींच लिए, जिसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ा।
दुनिया की टॉप-6 अर्थव्यवस्थाएं (नाममात्र GDP)
- अमेरिका: 30 ट्रिलियन डॉलर+ (नंबर-1 पर बरकरार)
- चीन: 19–20 ट्रिलियन डॉलर
- जर्मनी: ~5 ट्रिलियन डॉलर
- जापान: 4.38 ट्रिलियन डॉलर
- यूनाइटेड किंगडम (UK): 4.26 ट्रिलियन डॉलर
- भारत: 4.15 ट्रिलियन डॉलर
घबराने की बात नहीं: भारत अब भी ‘ग्रोथ इंजन’
रैंकिंग में गिरावट के बावजूद भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि वह 6.4% से 6.5% की दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। आईएमएफ का अनुमान है कि यह गिरावट महज अस्थायी है। भारत अपनी आंतरिक मांग और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के दम पर 2027-28 तक न केवल टॉप-5 में वापसी करेगा, बल्कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर भी अग्रसर रहेगा।
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