रुद्रपुर। स्कूली शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और महंगी फीस के खिलाफ सोमवार को अभिभावकों, शिक्षकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया। समाजसेवी सुब्रत कुमार विश्वास के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) हरेन्द्र मिश्रा के माध्यम से प्रशासन को अपनी मांगों का एक विस्तृत मांग-पत्र सौंपा।

प्रमुख आरोप और समस्याएं:
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि निजी स्कूलों ने शिक्षा को एक मुनाफे वाला व्यापार बना दिया है। उन्होंने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर नाराजगी जताई:

  • पुस्तकों और यूनिफॉर्म की बिक्री पर चुनिंदा दुकानों का एकाधिकार।
  • कमीशनखोरी के उद्देश्य से कक्षा-वार पुस्तक सूचियों की गोपनीयता।
  • बिना मान्यता वाले अवैध स्कूलों का संचालन।
  • अत्यधिक फीस वृद्धि जिससे मध्यम वर्ग आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

20 अप्रैल तक की चेतावनी:
सुब्रत कुमार विश्वास ने स्पष्ट किया कि वे आंदोलन नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि 20 अप्रैल तक इन 8 बिंदुओं पर ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो जिला मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। मांग की गई है कि मुख्य शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाकर पारदर्शी शिक्षा नीति लागू की जाए।

उपस्थिति:
इस विरोध प्रदर्शन में अभिमन्यु साना, मनीष गुप्ता, अश्विनी गंगवार, दलजीत सिंह, गौरव सरकार, विजय विश्वास, शिवपद साना, प्रियांशी सरकार, विनोद जोशी और प्रसेनजीत विश्वास सहित दर्जनों समाजसेवी और अभिभावक मौजूद रहे।


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