ग्वालियर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने वैवाहिक रिश्तों और आपसी विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवक की शादी के महज 28 दिन बाद खुलासा हुआ कि उसकी पत्नी दो महीने की गर्भवती है। इस धोखे के बाद मामला अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है, जहाँ कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को पूरे प्रकरण पर नए सिरे से विचार करने के आदेश दिए हैं।

यूं खुला राज

पीड़ित पति के अनुसार, शादी के कुछ ही दिनों बाद जब उसकी पत्नी की तबीयत बिगड़ी, तो वह उसे चेकअप के लिए डॉक्टर के पास ले गया। वहां कराए गए अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट ने पति के पैरों तले जमीन खिसका दी। रिपोर्ट में पत्नी दो महीने की गर्भवती पाई गई, जबकि शादी को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ था।

भ्रूण हत्या और धोखाधड़ी का आरोप

पति का आरोप है कि इस सच्चाई के सामने आने के बाद लड़की पक्ष और उसके ससुराल वालों ने आपसी सहमति से गुपचुप तरीके से भ्रूण हत्या (गर्भपात) करा दी। पति ने आरोप लगाया कि शादी से पहले ही युवती के गर्भवती होने की बात को छिपाकर उसके साथ बड़ी जालसाजी की गई।

अदालत का कड़ा रुख

इस मामले में पहले निचली अदालत से राहत न मिलने पर पति ने ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब ग्वालियर कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए हैं कि वे सभी उपलब्ध दस्तावेजों, मेडिकल रिपोर्ट और बयानों के आधार पर इस केस पर फिर से विचार करें। कोर्ट ने इस मामले में धोखाधड़ी और भ्रूण हत्या जैसे गंभीर पहलुओं की जांच की आवश्यकता जताई है।

कानूनी स्थिति

विशेषज्ञों के अनुसार, शादी से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी का आधार बन सकता है। साथ ही, बिना वैध कारण या पति की जानकारी के गर्भपात कराना भी कानूनी पचड़े में डाल सकता है।

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