​​पीलीभीत। भीषण गर्मी की शुरुआत और तराई के जंगलों में बढ़ते वनाग्नि के खतरे को देखते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) प्रशासन हाई अलर्ट पर है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम पूरे कर लिए हैं। बाघों के इस प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए टाइगर रिजर्व मुख्यालय पर एक अत्याधुनिक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित किया गया है। उपनिदेशक मनीष सिंह के अनुसार, जंगल को आग से बचाने के लिए इस बार त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है, जिसमें तकनीक और स्थानीय श्रम दोनों का प्रभावी समन्वय देखने को मिलेगा।

हेडक्वार्टर पर ‘वार रूम’ तैयार

जंगल की गतिविधियों पर 24 घंटे पैनी नजर रखने के लिए टाइगर रिजर्व मुख्यालय पर एक अत्याधुनिक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित किया गया है। यह कंट्रोल रूम सैटेलाइट डेटा और जमीनी सूचनाओं के बीच एक सेतु का काम करेगा, ताकि आग की छोटी सी चिंगारी की सूचना भी तत्काल रिस्पांस टीम तक पहुँच सके।

सुरक्षा का ‘त्रिस्तरीय’ चक्र: तकनीक और टीम का संगम

उपनिदेशक मनीष सिंह के अनुसार, इस बार वनाग्नि से निपटने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है:

  1. फायर वॉचर्स की तैनाती: जंगल के संवेदनशील हिस्सों में अनुभवी फायर वॉचर्स और वनकर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है।
  2. फायर लाइन्स का जाल: आग को एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में फैलने से रोकने के लिए पूरे टाइगर रिजर्व में ‘फायर लाइन्स’ (साफ पट्टियाँ) बनाई गई हैं।
  3. हाई-टेक मॉनिटरिंग: सैटेलाइट अलर्ट के माध्यम से ‘रियल टाइम’ लोकेशन ट्रैक की जा रही है, जिससे आग लगने की स्थिति में कम से कम समय में प्रतिक्रिया दी जा सके।

तराई के जंगलों के लिए बड़ी चुनौती

पीलीभीत टाइगर रिजर्व अपनी घनी घास और साल के जंगलों के लिए जाना जाता है, जो गर्मियों में बेहद ज्वलनशील हो जाते हैं। प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे जंगल के किनारे आग न जलाएं और किसी भी संदिग्ध धुएं की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें।
​विशेष स्ट्राइक टीमों का गठन और तकनीकी निगरानी
​प्रशासन ने रिजर्व की सभी पांचों रेंजों में दो-दो विशेष टीमों का गठन किया है। प्रत्येक टीम में सात दक्ष सदस्य शामिल हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मौके पर पहुँचकर मोर्चा संभालेंगे। इस वर्ष की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए फायर ब्रिगेड की भी सक्रिय सहायता ली जा रही है। इसके साथ ही, पीलीभीत टाइगर रिजर्व अब भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के सैटेलाइट अलर्ट सिस्टम से भी लैस है। जंगल में कहीं भी ‘हीट सिग्नेचर’ उभरते ही संबंधित रेंजर और बीट प्रभारी के मोबाइल पर रियल-टाइम लोकेशन का अलर्ट पहुँच जाएगा, जिससे रिस्पॉन्स टाइम में भारी कमी आएगी।


​सांगठनिक सुरक्षा उपाय और ‘कंट्रोल बर्निंग’

​जमीन पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी रेंजों में कार्यशालाएं आयोजित कर कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। जंगल के भीतर ‘कंट्रोल बर्निंग’ (नियंत्रित फुकान) का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है, ताकि आग लगने की स्थिति में ईंधन के रूप में उपलब्ध ज्वलनशील सामग्री कम रहे। इसके अतिरिक्त, संवेदनशील क्षेत्रों में बने वॉच टावरों पर वन रक्षकों की तैनाती की गई है और सूखे पत्तों को हटाने के लिए आधुनिक ब्लोअर मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। ‘फायर वाचर’ के रूप में स्थानीय युवाओं की भर्ती भी की गई है, जो विषम परिस्थितियों में आग बुझाने के अनुभवी होते हैं।
​पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा और जन-जागरूकता
​पीलीभीत टाइगर रिजर्व न केवल अपनी जैव विविधता बल्कि बाघों के घनत्व के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐसे में वनाग्नि जमीनी जीव-जंतुओं और बाघ के शावकों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है। इस खतरे को कम करने के लिए प्रशासन सीमावर्ती गांवों में व्यापक जागरूकता अभियान चला रहा है। ग्रामीणों को विशेष रूप से खेतों में पराली न जलाने की सलाह दी गई है, क्योंकि हवा के रुख के साथ चिंगारियां जंगल में पहुँचकर भीषण आग का कारण बन सकती हैं। इन समन्वित प्रयासों का उद्देश्य पीलीभीत के इस अनमोल पारिस्थितिक तंत्र को अग्नि मुक्त और सुरक्षित रखना है।

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