-डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री
पीलीभीत। सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और जनपद को ‘जीरो फेटालिटी’ (शून्य मृत्यु दर) की श्रेणी में लाने के लिए परिवहन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से कमर कस ली है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जिले के पांच सबसे खतरनाक मार्गों (क्रिटिकल कॉरिडोर) पर विशेष ‘क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों’ की तैनाती कर दी गई है। यह टीमें सड़क सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने के साथ-साथ दुर्घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक पद्धति से विश्लेषण भी करेंगी।
एआरटीओ वीरेंद्र सिंह के अनुसार, बरेली-पीलीभीत-सितारगंज मार्ग (एनएच-30), पीलीभीत-बीसलपुर मार्ग (एनएच-731के) और पीलीभीत-पूरनपुर-खुटार मार्ग (एनएच-730) पर पड़ने वाले पांच थानों जहानाबाद, बरखेड़ा, बीसलपुर, गजरौला और न्यूरिया—को क्रिटिकल थानों के रूप में चिह्नित किया गया है। इन थानों में गठित सीसी टीमें अत्याधुनिक उपकरणों जैसे स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर और बॉडी वॉर्न कैमरों से लैस रहेंगी। एआरटीओ ने स्पष्ट किया कि इन टीमों का मुख्य उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि सड़क पर जीवन बचाना है।
परिवहन विभाग की इस योजना के तहत रात के समय ड्राइवरों की ‘स्लीप चेक’ (नींद की जांच) पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एआरटीओ ने बताया कि सीसी टीमें हाईवे पर स्थित ढाबों, पेट्रोल पंपों और मैरिज हॉल के सामने होने वाली अवैध पार्किंग को तत्काल हटवाएंगी। यदि कोई चालक थका हुआ या नींद के प्रभाव में पाया जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से विश्राम की सलाह दी जाएगी। इसके अलावा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नए नियमों के तहत दुर्घटनाओं की विवेचना अब अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम होगी, ताकि भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने जनसामान्य से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और ‘जीरो फेटालिटी’ मिशन में सहयोग दें। उन्होंने चेतावनी दी कि हाईवे पर अतिक्रमण करने वालों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के खिलाफ अब और अधिक कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।