पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस करते हुए वन प्रशासन ने जंगलों की निगरानी को और अधिक पुख्ता करने का निर्णय लिया है। वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल के भीतर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए रिजर्व में चार नए अत्याधुनिक पीटीजेड (पैन-टिल्ट-ज़ूम) कैमरे लगाए जाएंगे। वर्तमान में टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था आठ पीटीजेड कैमरों के जरिए सुनिश्चित की जा रही है, लेकिन इन चार नए कैमरों की स्थापना के बाद इनकी कुल संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी। सुरक्षा के इस घेरे के विस्तार से न केवल शिकार जैसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और उनकी आवाजाही की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग भी बेहतर ढंग से संभव हो सकेगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक मनीष सिंह ने इस तकनीकी अपग्रेडेशन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये नए कैमरे विशेष रूप से टाइगर रिजर्व के चार अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रेसलैंड्स (घास के मैदानों) में स्थापित किए जा रहे हैं। योजना के अनुसार, पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध चुका ग्रेसलैंड में एक, भेला ग्रेसलैंड में दो और लिडिसिया ग्रेसलैंड में एक कैमरा लगाया जाएगा। ये चारों स्थान वन्यजीवों, विशेषकर बाघों और शाकाहारी पशुओं की सक्रियता के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ग्रेसलैंड्स में इन कैमरों की मौजूदगी से सुरक्षा कर्मियों को दूर बैठे ही विस्तृत क्षेत्र की स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।
इन कैमरों की तकनीकी विशिष्टता और कार्यप्रणाली के विषय में बताते हुए उपनिदेशक ने कहा कि पीटीजेड कैमरे पूरी तरह से सैटेलाइट आधारित तकनीक से संचालित होते हैं। ‘पैन-टिल्ट-ज़ूम’ सुविधा से लैस होने के कारण इन कैमरों को किसी भी दिशा में घुमाया जा सकता है और दूर स्थित वस्तु को अत्यधिक ज़ूम करके स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इन सभी कैमरों का सीधा जुड़ाव पीलीभीत टाइगर रिजर्व मुख्यालय पर स्थित एकीकृत नियंत्रण कक्ष (इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम) से होगा। कंट्रोल रूम में तैनात विशेषज्ञ चौबीसों घंटे इन कैमरों के जरिए जंगल की हर हलचल पर सीधी नजर रखेंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति या घुसपैठ की सूचना तत्काल प्रभाव से मैदानी टीम तक पहुंच सकेगी।
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