पीलीभीत। उत्तर प्रदेश सरकार के नौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख उस समय बेहद असहज नजर आए जब पत्रकारों ने सरकार की उपलब्धियों के दावों के बीच स्थानीय भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था से जुड़े तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए। स्थानीय लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह में आयोजित इस वार्ता में मंत्री औलख प्रदेश सरकार की सफलताएं गिनाने ही वाले थे कि पत्रकारों ने सत्ताधारी दल के नगर अध्यक्ष द्वारा शहर कोतवाली में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना दिए जाने का मुद्दा उठा दिया। पत्रकारों ने सवाल किया कि यदि प्रदेश में कानून व्यवस्था इतनी सुदृढ़ है, तो भाजपा के नगर अध्यक्ष को अपने ही पदाधिकारियों के विरुद्ध दर्ज कथित झूठे मुकदमों के विरोध में धरने पर क्यों बैठना पड़ा? इस पर प्रभारी मंत्री ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है और यदि ऐसा हुआ है, तो यह गंभीर विषय है जिस पर वह जिला अध्यक्ष के साथ बैठक करेंगे।
प्रेस वार्ता के दौरान जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में प्रकाश में आए 50 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले और मुख्य आरोपी इल्हाम शमसी पर ठोस कार्रवाई न होने को लेकर भी मंत्री को घेरा गया। जब उन्हें बताया गया कि इस प्रकरण में जिलाधिकारी द्वारा शासन के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है, तब भी प्रभारी मंत्री ने इस विषय पर जानकारी न होने की बात कही, हालांकि उन्होंने बाद में मामले की जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त, गोमती नदी के उद्गम स्थल की उपेक्षा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नौ वर्षों में एक बार भी वहां न पहुंचने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह जिला अध्यक्ष के माध्यम से मुख्यमंत्री का कार्यक्रम यहां लगवाने का प्रयास करेंगे। टाइगर रिजर्व में स्थाई फील्ड डायरेक्टर की नियुक्ति के सवाल पर भी मंत्री कोई स्पष्ट उत्तर देने के बजाय पर्यटन के बढ़ते ग्राफ की चर्चा कर बात को टालते नजर आए।
मंत्री बलदेव सिंह औलख ने अपने संबोधन में योगी सरकार के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सपा सरकार की ‘एक जिला एक माफिया’ की नीति को समाप्त कर दिया गया है और अब अपराधी जेलों में हैं। उन्होंने बनारस, अयोध्या और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों पर बढ़ते विदेशी व घरेलू पर्यटन को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। हालांकि, वार्ता में मोड़ तब आया जब पत्रकारों के निरंतर चुभते सवालों से परेशान होकर मंत्री ने कैमरे बंद करने का निर्देश दे दिया। इस पर पत्रकारों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए सवाल किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे सार्वजनिक आयोजन में ऐसी कौन सी गोपनीय बात है जिसे रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता। विरोध बढ़ता देख प्रभारी मंत्री और अधिक असहज हो गए और उन्होंने बिना विस्तृत उत्तर दिए हाथ जोड़कर प्रेस वार्ता समाप्त कर दी। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, पूर्व जिला अध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, विधायक स्वामी प्रवक्तानंद और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ. गुरुभाग सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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