लखनऊ/कानपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए 99 विस्थापित हिंदू परिवारों के पुनर्वास को मंजूरी दे दी गई है। ये परिवार पिछले पांच दशकों से भी अधिक समय से मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र में एक झील की जमीन पर अस्थायी और अवैध रूप से रह रहे थे। अब इन्हें कानपुर देहात में सम्मानजनक नया ठिकाना मिलेगा।

मेरठ से कानपुर देहात का सफर

वर्ष 1970 में पूर्वी पाकिस्तान में हुए उत्पीड़न के बाद ये परिवार भारत आए थे। मेरठ के हस्तिनापुर में इन्हें अस्थायी रूप से बसाया गया था, लेकिन वह भूमि सिंचाई विभाग की झील और वन क्षेत्र के अंतर्गत आती थी। लंबे समय से ये परिवार स्थायी आवास की मांग कर रहे थे। योगी सरकार के इस फैसले से अब उनके वनवास का अंत होने जा रहा है।

क्या मिलेगा इन परिवारों को?

सरकार की योजना के अनुसार, इन परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के भैंसया गांव में बसाया जाएगा। पुनर्वास पैकेज के तहत प्रत्येक परिवार को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:

  1. आवास के लिए भूमि: प्रत्येक परिवार को घर बनाने के लिए 200 वर्ग मीटर का आवासीय भूखंड दिया जाएगा।
  2. खेती के लिए जमीन: जीविकोपार्जन के लिए हर परिवार को 2 एकड़ कृषि योग्य भूमि आवंटित की जाएगी।
  3. आवास सहायता: ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ के तहत इन्हें घर बनाने के लिए 1.20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।

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प्रशासनिक तैयारी और महत्व

एक दैनिक के रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर देहात में लगभग 121 हेक्टेयर भूमि इस उद्देश्य के लिए चिन्हित की गई है। इस भूमि को पहले ही अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है।

यह कदम न केवल मेरठ की प्राकृतिक झील के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उन विस्थापितों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी बड़ा कदम है, जो पीढ़ियों से अपनी पहचान और छत के लिए संघर्ष कर रहे थे।

योजना की मुख्य बातें एक नज़र में:

  • लाभार्थी: 99 विस्थापित बंगाली हिंदू परिवार।
  • स्थानांतरण: मेरठ (हस्तिनापुर) से कानपुर देहात (रसूलाबाद)।
  • कुल भूमि: 2 एकड़ कृषि भूमि + 200 वर्ग मीटर आवासीय प्लॉट प्रति परिवार।
  • अतिरिक्त लाभ: मुख्यमंत्री आवास योजना का नकद लाभ।

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