पीलीभीत। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे अवैध रिसॉर्ट्स और होम स्टे के निर्माण को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। लखनऊ निवासी शशांक सिंह द्वारा दायर 308 पृष्ठों की एक व्यापक याचिका पर सुनवाई करते हुए प्राधिकरण ने यह कदम उठाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि टाइगर रिजर्व का ‘इको सेंसिटिव जोन’ निर्धारित न होने का फायदा उठाकर कई प्रभावशाली लोगों ने जंगल की सीमा से सटकर बड़े पैमाने पर रिसॉर्ट्स का निर्माण कर लिया है। इतना ही नहीं, रिपोर्टों के अनुसार एक रिसॉर्ट मालिक ने तो निर्माण सामग्री को जंगल के कोर एरिया (संरक्षित क्षेत्र) में फेंक दिया, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एनजीटी ने एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में पीलीभीत के जिलाधिकारी को समन्वय अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि प्रधान वन संरक्षक (वन्य जीव) और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के एक-एक प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्राधिकरण ने समिति को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर जाकर जमीनी हकीकत का निरीक्षण करें और अपनी विस्तृत रिपोर्ट 9 अप्रैल 2026 से पहले प्रस्तुत करें। याचिकाकर्ता ने जंगल की सुरक्षा के लिए इन अवैध ढांचों को तत्काल हटाने की मांग की है। अब इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी, जिसमें जांच रिपोर्ट के आधार पर रिसॉर्ट स्वामियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *