लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी द्वारा कांशीराम जयंती को ‘PDA दिवस’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के रूप में मनाने के ऐलान पर कड़ा प्रहार किया है। मायावती ने इसे सपा की ‘विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाजी’ करार देते हुए कहा कि यह दलितों और पिछड़ों के वोट हथियाने के लिए किया जा रहा एक ‘दिखावा’ है।
‘सपा का चेहरा हमेशा दलित विरोधी रहा’
बृहस्पतिवार (26 फरवरी 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने सपा के इतिहास पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा:
- दिखावा और छलावा: सपा द्वारा कांशीराम जी के नाम का सहारा लेना केवल चुनावी लाभ के लिए है।
- महापुरुषों का अपमान: मायावती ने आरोप लगाया कि सपा का ‘चाल, चरित्र और चेहरा’ हमेशा से दलितों, पिछड़ों और बहुजन समाज में जन्मे संतों व महापुरुषों के प्रति अपमानजनक रहा है।
- PDA पर तंज: उन्होंने कहा कि मीडिया और खुद PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लोग सपा की असलियत अच्छी तरह जानते हैं।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, समाजवादी पार्टी ने आगामी 15 मार्च को बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की जयंती को पूरे प्रदेश में ‘PDA दिवस’ के रूप में बड़े स्तर पर मनाने का निर्णय लिया है। सपा का उद्देश्य इसके जरिए दलित और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को अपने पाले में लाना है, जिसे मायावती अपनी राजनीतिक जमीन पर अतिक्रमण मान रही हैं।
बसपा का रुख
मायावती ने स्पष्ट किया कि जो पार्टी सत्ता में रहते हुए दलितों के हितों के खिलाफ काम करती रही, वह आज उनके मसीहा के नाम पर राजनीति कर रही है। बसपा समर्थकों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सपा कभी भी दलितों की सच्ची हितैषी नहीं हो सकती।
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