देहरादून/रामनगर : उत्तराखंड के पहाड़ों से लेकर मैदानों तक 21 फरवरी से बोर्ड परीक्षाओं का शोर सुनाई देगा। साल भर की पढ़ाई, रातों की नींद और ढेर सारी उम्मीदों को समेटे करीब 2.15 लाख छात्र 21 फरवरी से अपनी पहली परीक्षा देने सेंटरों पर पहुंचेंगे। यह सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि इन छात्रों के करियर की पहली बड़ी सीढ़ी है
किस्मत आजमाएंगे सवा दो लाख छात्र:
इस बार के आंकड़े दिलचस्प हैं। हाईस्कूल (10वीं) के 1.12 लाख और इंटरमीडिएट (12वीं) के करीब 1.03 लाख छात्र अपनी पेन की ताकत दिखाने के लिए तैयार हैं। विभाग ने भी प्रदेश के कोने-कोने में 1261 परीक्षा केंद्र बनाकर अपनी बिसात बिछा दी है।
नकलचियों की खैर नहीं, ‘सुपर 6’ पर नजर:
शिक्षा विभाग इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। प्रदेश के 156 सेंटरों को संवेदनशील माना गया है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उन6 ‘अति-संवेदनशील’ सेंटरों की है जहां परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती ने साफ कर दिया है कि सब कुछ तैयार है। सचल दस्तों (फ्लाइंग स्क्वायड) को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि परीक्षा की पवित्रता बनी रहे।
चुनौती बड़ी, पर जज्बा कायम:
जहाँ एक तरफ छात्र एडमिट कार्ड और पेन पेंसिल समेट रहे हैं, वहीं प्रशासन ने नकल माफिया और गड़बड़ी करने वालों को सख्त संदेश दे दिया है। अब बस इंतजार है 21 फरवरी की सुबह का, जब उत्तराखंड के भविष्य की पहली घंटी बजेगी।