पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सुरक्षा और इसके समृद्ध वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना के तहत पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सीमा के आसपास 0 से 2 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ‘पारिस्थितिकी संवेदी जोन’ घोषित किया गया है। यह कदम बाघों के प्राकृतिक आवास को मानवीय हस्तक्षेप और प्रदूषण से बचाने के लिए उठाया गया है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व कुल 730.24 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 602.79 वर्ग किमी कोर एरिया और 127.45 वर्ग किमी बफर क्षेत्र शामिल है। यह क्षेत्र न केवल बाघों के लिए, बल्कि बंगाल फ्लोरिकन, हिस्पिड खरगोश और हिरणों की पांच दुर्लभ प्रजातियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वन अधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि यह अधिसूचना रिजर्व की जैव विविधता को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने और पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
जारी अधिसूचना के अनुसार, इस पारिस्थितिकी संवेदी जोन का कुल क्षेत्रफल 575 वर्ग किलोमीटर होगा। उत्तर में उत्तराखंड की अंतरराज्यीय सीमा और उत्तर-पूर्व में नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा होने के कारण वहां विस्तार 0 किलोमीटर रखा गया है। वहीं, पीलीभीत के ग्रामीण क्षेत्रों और शाहजहाँपुर की सीमा की ओर इसे 1 से 2 किलोमीटर तक विस्तारित किया गया है। इसके दायरे में कुल 230 गांव शामिल होंगे।
सरकार ने इस जोन के भीतर गतिविधियों को तीन श्रेणियों—प्रतिषिद्ध, विनियमित और संवर्धित में बांटा है
इको सेंसेटिव जोन के भीतर नए खनन, पत्थर उत्खनन, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की स्थापना, आरा मिलों, ईंट भट्टों और व्यावसायिक रूप से लकड़ी के उपयोग पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा, प्राकृतिक जल निकायों में अशोधित कचरा बहाना भी प्रतिबंधित होगा।
विनियमित गतिविधियों में संरक्षित क्षेत्र की सीमा से 1 किमी के भीतर नए होटलों और रिसॉर्ट्स के निर्माण पर रोक रहेगी। 1 किमी के दायरे के बाहर भी निर्माण कार्य पर्यटन महायोजना के नियमों के अधीन होगा। रात के समय वाहनों का आवागमन और पेड़ों की कटाई भी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से ही संभव होगी।
वर्षा जल संचयन, जैविक खेती, सौर ऊर्जा का उपयोग, कुटीर उद्योग और हरित तकनीक को सरकार सक्रिय रूप से बढ़ावा देगी।
अधिसूचना लागू होने के बाद अब राज्य सरकार स्थानीय लोगों के परामर्श से अगले दो वर्षों के भीतर एक ‘आंचलिक महायोजना’ तैयार करेगी। यह योजना भूमि उपयोग, जल प्रबंधन और स्थानीय समुदाय की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इसकी निगरानी के लिए जिलाधिकारी पीलीभीत की अध्यक्षता में एक ‘निगरानी समिति’ का गठन किया गया है, जिसमें पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उप निदेशक सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह फिलहाल एक प्रारूप अधिसूचना है। इससे प्रभावित होने वाले व्यक्ति या संस्थाएं अपनी आपत्तियां या सुझाव अगले 60 दिनों के भीतर सचिव, पर्यावरण मंत्रालय को लिखित में या ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं।
इको सेंसेटिव जोन में आने वाले गांव
भारत सरकार द्वारा जारी इस अधिसूचना के अनुसार, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के अंतर्गत कुल 230 गांवों को शामिल किया गया है, जो मुख्य रूप से पीलीभीत और शाहजहाँपुर जिले की विभिन्न तहसीलों में स्थित हैं। इन गांवों में प्रमुख रूप से माला गोयल कॉलोनी, धेरम मंदारिया, सिरसा सरदाह, माला कॉलोनी, पांडे कॉलोनी, गांधीनगर, कलकत्ता कॉलोनी और कंजा हरैया जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ज्ञानपुर, अजीतपुर पटपरा, राम नगरैया, महुआ अजीतपुर और गजरौला कला जैसे घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों को भी इस विशेष पारिस्थितिकी क्षेत्र का हिस्सा बनाया गया है। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वन अधिकारी मनीष सिंह के अनुसार, इन गांवों की सूची तैयार करते समय भौगोलिक अक्षांश और देशांतर का सटीक ध्यान रखा गया है ताकि रिजर्व की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अधिसूचना में वर्णित सूची में रानीगंज, बांस खेड़ा, बड़ेपुरा, चतुर्भुजपुर, अमखिड़िया, ढकिया, केशरापुर, चकपुर और इमलिया फार्म जैसे गांवों का भी उल्लेख है। पूरनपुर और कलिनगर तहसील के अंतर्गत आने वाले सफहा, बरुआ, संदई पड़ाव, शाहगढ़ और अभयपुर जैसे गांव इस जोन के 2 किलोमीटर के दायरे में आते हैं। साथ ही रायपुर मु. रामपुर, पिपरिया करम, बानगंज ग्रांट, शिव नगर, बड़ी महदिया, छोटी महदिया, इटौरिया और गुलड़िया खास जैसे क्षेत्रों को भी ईको-सेंसिटिव जोन की सीमाओं के भीतर रखा गया है। इन क्षेत्रों में अब किसी भी प्रकार के व्यावसायिक निर्माण या बड़े बदलाव के लिए निगरानी समिति और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
इस सूची में अन्य महत्वपूर्ण गांव जैसे पिंडारा, वैजुनगर, विधिपुर, दमगढ़ी फार्म, गढ़ा पचपेड़ा फार्म, नदाहा और पौरखास फार्म भी शामिल हैं। तराई क्षेत्र के महत्वपूर्ण गांव जैसे बिशनपुर (ग्रांट नं. 2), लालपुर, सकरिया सिसैया, भोपतपुर, बलदेवपुर, मैथी, सैदुल्लागंज, साडा और टंडोला को भी इस संरक्षित दायरे में लिया गया है। वहीं मटैना कॉलोनी, जमुनिया, जगतपुर, शेरपुर, मकरंदपुर, घुंघचाई और मदारपुर जैसे गांव जो टाइगर रिजर्व के बफर और कोर एरिया के काफी करीब हैं, उनकी सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है। माधोपुर, चंदोइया और आनंदपुर जैसे गांवों के शामिल होने से अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व के चारों ओर एक सुरक्षित गलियारा तैयार हो सकेगा, जिससे वन्यजीवों और मानव के बीच होने वाले संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
https://www.facebook.com/share/p/15hGqZThaz