प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष (यूसीएफ) को स्‍वीकृति देने के लिए केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की सराहना की है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में श्री मोदी ने कहा कि यह कोष उच्‍च गुणवत्ता की शहरी अवसंरचना प्रदान करने के लिए बाजार वित्त, निजी भागीदारी और नागरिक केंद्रित सुधारों का लाभ उठाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल शहरों को देश की आर्थिक वृद्धि का मुख्य प्रेरक बनाएगी।

शहरी चुनौती कोष (यूसीएफ) गृह और शहरी मामलों के मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित संयुक्‍त योजना है। इसमें केंद्र की ओर से कुल एक लाख करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इस कोष का उद्देश्य लचीले, उत्पादक, समावेशी और जलवायु के प्रति संवेदनशील शहरों का निर्माण करना है, ताकि उन्हें देश के आर्थिक विकास के अगले चरण के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित किया जा सके। इस कोष का उद्देश्य परियोजनाओं को ऋण योग्य बनाकर ऋणदाताओं और निजी भागीदारों के लिए जोखिम को कम करके निजी पूंजी को आकर्षित करना है। यह कोष परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक का समर्थन देगा, बशर्ते की परियोजना लागत का न्यूनतम 50 प्रतिशत बाजार से जुटाया जाए, जिससे निजी भागीदारी के लिए एक स्पष्ट मार्ग प्रशस्त हो। यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक काम करेगा, जिसे वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है। इस कदम से अगले पांच सालों में शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह भारत के शहरी विकास के तौर-तरीकों में अनुदान आधारित वित्त से मार्केट-लिंक्ड, सुधार और नतीजे पर आधारित अवसंरचना बनाने की ओर एक बड़ा बदलाव भी लाएगा।

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