सितारगंज। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कथित तौर पर मैदान का शुद्धिकरण किए जाने के मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। पूर्व विधायक नारायण पाल ने घटना का कड़ा विरोध जताते हुए इसे लोकतांत्रिक और सामाजिक मूल्यों के विपरीत बताया।
मंगलवार को पूर्व विधायक नारायण पाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसडीएम कार्यालय परिसर में करीब दो घंटे तक मौन उपवास किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में काली पट्टी बांधकर कथित घटना की निंदा की और सार्वजनिक स्थलों को लेकर इस तरह की गतिविधियों पर सवाल उठाए।
पूर्व विधायक नारायण पाल ने कहा कि किसी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जनसभा के बाद सार्वजनिक मैदान का कथित रूप से शुद्धिकरण किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से समाज में भेदभाव और वैमनस्य को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और सामाजिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इसकी निंदा की।
शक्तिफार्म में भी कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन
इधर, शक्तिफार्म में भी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष उत्तम आचार्य के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन प्रभारी निरीक्षक को सौंपा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कथित घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक स्थलों को किसी व्यक्ति, धर्म या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर बांटना लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। उन्होंने घटना की कड़ी निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर कथित घटना के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन और ज्ञापन देने वालों में तेजपाल सिंह, करन जंग, सरताज अहमद, सुकुमार चक्रवर्ती, हरपाल सिंह, बलवंत बोहरा, सुमिंदर यादव, श्रीकांत मिस्त्री, दिनेश सिंह बोरा, सूर्य प्रताप सिंह, मनोज सुतार, नृपेन अधिकारी, सपना ओझा, सावित्री हालदार, लक्ष्मी चौधरी, गुड़िया अधिकारी, अमित सरकार, अजय सिंह सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।