पीलीभीत। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर पीलीभीत के पंजाबियान में ‘यौमे-जश्न-ए-आज़ादी’ के तहत एक भव्य मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। डॉ. मोहसिन रज़ा खान (अरब वाले) एवं सलीम रज़ा ख़ान के निवास स्थान पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मुजाहिद रज़ा ख़ान ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन जियाउद्दीन ज़िया एडवोकेट ने किया।
सांस्कृतिक संध्या का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को नमन करने के साथ-साथ समाज में देशभक्ति, राष्ट्रीय अखंडता और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना रहा।
देशप्रेम और अमन के रंगों से सजी महफ़िल
कार्यक्रम में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए प्रमुख शायरों, कवियों और कवयित्रियों ने अपनी बेहतरीन रचनाएँ प्रस्तुत कीं। मंच पर सुल्तान जहां पूरनपुरी, सरोज सरगम, ज़ुल्फ़िक़ार नाज़िश, मुजीब साहिल, जियाउद्दीन ज़िया एडवोकेट और संजीव शशि ने देशभक्ति, इंसानियत और सामाजिक एकता पर आधारित कलाम पेश कर श्रोताओं की खूब दाद बटोरी।
शायर ज़ुल्फ़िक़ार नाज़िश ने अपने विशेष अंदाज़ में पढ़ते हुए महफ़िल में जोश भरा:
“वफ़ा से देखना लथपथ मेरा ईमान निकलेगा,
लहू के आख़िरी क़तरे तक हिंदुस्तान निकलेगा।”
वहीं मुजीब साहिल ने अपने दिलकश कलाम से समां बांधा:
“तिरंगे तिरंगे नज़र आ रहे हैं हवाओं का रुख़ अब बदलने लगा है,
चिराग़े वफ़ा हाथ में लेके साहिल ज़माना घरों से निकलने लगा है।”
आयोजक व संयोजक डॉ. मोहसिन रज़ा ख़ान और सलीम रज़ा ख़ान ने कहा कि भारत की आज़ादी अनगिनत ज्ञात-अज्ञात सेनानियों के त्याग और बलिदान की बदौलत है। साहित्य, कविता और शायरी ऐसे प्रभावी माध्यम हैं जो नई पीढ़ी को हमारे स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों से जोड़ते हैं और समाज में भाईचारे की नींव मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर महमूद रज़ा ख़ान, सैयद वकार अली, मुस्तकीम रज़ा ख़ान, अजमल, निजाकत अली, राशिद, अनस अंसारी, अफाक शम्सी, मोहताशिम रजा खान, यावर अली, सैयद अरसलान, हाफ़िज़ मो. उमर, फ़ैज़ी, फ़ोज़िया ज़ुल्फ़िकार, शिफ़ा ख़ान, कायनात और क़ासिमा समेत बड़ी संख्या में स्थानीय साहित्यप्रेमी और नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, रचनाकारों व सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।