समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने आज, 8 फरवरी 2026 को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए हैं।
मुख्य आरोप और दावे:
- प्रोफेशनल एजेंसियों की नियुक्ति: अखिलेश यादव ने दावा किया कि सरकार ने दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों से काम करने वाली पेशेवर एजेंसियों को नियुक्त किया है। उनके पास पूरी मतदाता सूची का डेटा है, जिसका उपयोग वे उन बूथों की पहचान करने के लिए कर रहे हैं जहाँ समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनावों में जीत हासिल की थी।
- चुनिंदा बूथों को निशाना बनाना: उनका आरोप है कि इन एजेंसियों के माध्यम से उन विशिष्ट बूथों को निशाना बनाया जा रहा है ताकि वहां से सपा समर्थकों के नाम काटे जा सकें।
- फॉर्म-7 का दुरुपयोग: उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 (जो मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज करने के लिए होता है) को व्यवस्थित तरीके से भरकर और प्रिंट करके इन बूथों पर भेजा जा रहा है। उन्होंने कुछ वीडियो और उदाहरण भी साझा किए जहाँ जाली हस्ताक्षरों के जरिए नाम हटाने की कोशिश की गई।
- निर्वाचन आयोग पर निशाना: यादव ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे अपनी इमारत पर भाजपा का झंडा लगा लेना चाहिए क्योंकि वह सत्ता पक्ष के “सहयोगी” की तरह काम कर रहा है।
- अन्य राज्यों का संदर्भ: उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी SIR प्रक्रिया का उपयोग करके भाजपा ने बिहार चुनाव जीता था और अब पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।