हरिद्वार। उत्तराखंड की हरिद्वार पुलिस ने बैरागी कैंप से 3 वर्षीय मासूम राधिका के अपहरण मामले में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने महज 72 घंटों के भीतर एक बड़े अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए राधिका समेत दो मासूम बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस टीम ने इस सनसनीखेज मामले में गिरोह के मुख्य सरगना, दो महिलाओं सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

👶 2 से 5 लाख रुपये में निसंतान दंपतियों को बेचते थे बच्चे

पुलिस पूछताछ में इस शातिर गिरोह को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह अंतरराज्यीय गैंग मुख्य रूप से गरीब परिवारों या खुले स्थानों से छोटे बच्चों को चुराता था। इसके बाद, गिरोह के सदस्य इन मासूम बच्चों को ₹2 लाख से लेकर ₹5 लाख तक की मोटी रकम में निसंतान दंपतियों (जिनके बच्चे नहीं होते) को बेच देते थे।

👥 कॉर्पोरेट स्टाइल में बंटी थी गैंग के सदस्यों की जिम्मेदारी

इस गैंग का नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। गिरोह के हर सदस्य की जिम्मेदारी पहले से तय थी:

  • कुछ सदस्यों का काम सिर्फ भीड़भाड़ वाले या खुले इलाकों से बच्चों को चिन्हित करना और उनका अपहरण (चोरी) करना था।
  • महिलाओं और अन्य सदस्यों का काम चोरी किए गए बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर छिपाकर रखना और निसंतान खरीदारों की तलाश करना था।

👮 पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बची मासूमों की जान

बैरागी कैंप से राधिका के गायब होने के बाद पुलिस कप्तान के निर्देश पर कई टीमें और सर्विलांस सेल को एक्टिव किया गया था। पुलिस ने लगातार छापेमारी कर 72 घंटे के भीतर न सिर्फ राधिका को खोज निकाला, बल्कि एक अन्य मासूम को भी इस नरक में बिकने से बचा लिया। हरिद्वार पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क, बैंक खातों और पूर्व में बेचे गए बच्चों की कुंडली खंगालने के लिए अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क साध रही है।


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