रूद्रपुर। साइबर अपराधियों ने निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का एक नया और बेहद शातिर जाल बुनते हुए काशीपुर के एक व्यवसायी को करीब 28.85 लाख रुपये की चपत लगा दी। ठगी की यह वारदात फेसबुक विज्ञापन से शुरू होकर एक फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप और फिर प्ले स्टोर पर मौजूद एक संदिग्ध ऐप के जरिए अंजाम दी गई।

पीड़ित की तहरीर पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन रूद्रपुर ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है। ठगी के इस सुनियोजित सिलसिले की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई जब काशीपुर के ओझान मोहल्ला निवासी एकांत जैन पुत्र स्व0 रजत कुमार जैन ने अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर बाजार में निवेश से जुड़ा एक आकर्षक विज्ञापन देखा। विज्ञापन में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप पर रिडायरेक्ट कर दिया गया। इस ग्रुप में ठगों ने एडमिन के रूप में कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया था जो खुद को शेयर मार्केट विशेषज्ञ बताते थे। ग्रुप में एकांत जैन के अलावा कई अन्य लोग भी जुड़े थे जो लगातार आईपीओ और शेयरों में निवेश से हो रहे भारी मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा करते थे।इन फर्जी दावों और ग्रुप के अन्य सदस्यों के (जो संभवतः ठगों के साथी थे) कृत्रिम उत्साह से प्रेरित होकर पीड़ित ने भी निवेश करने का मन बना लिया। विश्वास जीतने के लिए ठगों ने एकांत को एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया। इस ऐप की विश्वसनीयता साबित करने के लिए ठगों ने गूगल प्ले स्टोर का एक लिंक साझा किया जिससे पीड़ित को शक नहीं हुआ। ठगों के निर्देशानुसार एकांत जैन ने 10 दिसंबर 2025 को पहली बार 50 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से स्थानांतरित किए इसके बाद मुनाफे का लालच देकर ठगों ने उनसे किश्तों में मोटी रकम वसूलनी शुरू कर दी। 10 दिसंबर 2025 से 13 जनवरी 2026 के बीच पीड़ित ने कुल 28,85,000 रुपये ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न खातों में जमा कराए। इन खातों में एक्सिस बैंक की एमएच इंटरप्राईजेज यस बैंक मुरादाबाद, इंडसइंड बैंक की ‘राईस ब्लिस ट्रेडर्स’ और साउथ इंडियन बैंक जैसे संस्थानों के खाते शामिल थे। धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने ऐप के वॉलेट में दिख रही अपनी रकम को निकालने (विड्रॉल) का प्रयास किया जैसे ही उन्होंने निकासी के लिए आवेदन किया, ऐप ने उनके ट्रांजैक्शन पर रोक लगा दी। जब एकांत ने ग्रुप एडमिन से संपर्क किया तो उन्होंने पैसे देने के बजाय टैक्स और अन्य शुल्कों के नाम पर और अधिक धनराशि की मांग शुरू कर दी। ठगों के इस रवैये से पीड़ित को अपनी गलती का एहसास हुआ उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत भारत सरकार के साइबर पोर्टल पर दर्ज कराई लेकिन तकनीकी त्रुटि के कारण उनके दो परिचितों के खाते भी फ््रीज हो गए जिन्हें अब पुलिस के माध्यम से खुलवाने की प्रक्रिया चल रही है। साइबर थाना पुलिस ने अब इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच शुरू कर दी है जिसमें उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की ट्रेसिंग की जा रही है जिनके जरिए इस बड़ी डिजिटल डकैती को अंजाम दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *