उत्तराखंड की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की कुमाऊं साइबर टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। टीम ने 1.47 करोड़ रुपये के बहुचर्चित डिजिटल अरेस्ट मामले में लंबे समय से फरार चल रहे ₹50 लाख की ठगी के रकम के मुख्य लाभार्थी (बेनिफिशियरी) खाताधारक को हरियाणा के अंबाला से गिरफ्तार कर लिया है। माननीय न्यायालय द्वारा इस अभियुक्त के खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। इस हाईप्रोफाइल साइबर ठगी मामले में कुमाऊं साइबर टीम पिछले काफी समय से डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालने में जुटी हुई थी।
घटनाक्रम के अनुसार, साल 2025 में साइबर ठगों ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय की एक सेवानिवृत्त महिला कुलपति (वरिष्ठ नागरिक) को अपना निशाना बनाया था। शातिर ठगों ने खुद को महाराष्ट्र साइबर क्राइम का फर्जी अधिकारी बताकर नैनीताल निवासी पीड़िता को बुरी तरह डराया और धमकाया। ठगों ने महिला से कहा कि उनके नाम पर खुले एक बैंक खाते से 60 करोड़ रुपये की अवैध मनी लॉन्ड्रिंग की गई है, जिसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाकर शातिरों ने ऑनलाइन वेरिफिकेशन के नाम पर पीड़िता को लगातार 12 दिनों तक व्हाट्सएप कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ यानी वीडियो कॉल पर बंधक बनाए रखा। इस दौरान डरी-सहमी पीड़िता से ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
पीड़िता की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना रुद्रपुर में संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस पूर्व में ही तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इसके बाद एसटीएफ की साइबर टीम ने गहन तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और बैंक खातों के डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मुख्य वांछित अभियुक्त भूपिन्दर सिंह को चिन्हित किया। पुलिस टीम ने जाल बिछाकर आरोपी भूपिन्दर सिंह को उसके निवास स्थान ग्राम पिलखनी, थाना शाह, जनपद अंबाला (हरियाणा) से धर दबोचा। जांच में सामने आया है कि ठगी गई कुल रकम में से सीधे 50 लाख रुपये इसी अभियुक्त के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे।
इस बेहद जटिल और अंतरराज्यीय मामले का खुलासा करने वाली जांबाज साइबर टीम में प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार, उपनिरीक्षक शंकर सिंह रावत, अतिरिक्त उपनिरीक्षक सत्येंद्र गंगोला, हेड कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह सामंत और हेड कांस्टेबल मनोज कुमार मुख्य रूप से शामिल रहे। एसटीएफ के आला अधिकारियों ने साइबर टीम की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई की सराहना की है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि इस गैंग से जुड़े अन्य बड़े चेहरों और नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।