सितारगंज। उत्तराखंड के पारंपरिक, सांस्कृतिक और प्रकृति पूजा के प्रतीक लोक-पर्व ‘हरेला’ के पावन अवसर पर बुधवार को कोतवाली सितारगंज परिसर में एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रभारी निरीक्षक सुंदरम शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष पर्यावरण अभियान का मुख्य उद्देश्य वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करना और पुलिस लाइंस व थानों के भीतर हरित वातावरण को बढ़ावा देना था। इस गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान कोतवाली परिसर की रिक्त पड़ी भूमि और उद्यानों को हरा-भरा बनाने के लिए खाकी महकमे के तमाम सब-इंस्पेक्टरों, हेड कांस्टेबलों और महिला पुलिसकर्मियों ने अत्यंत उत्साह के साथ अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।

इस विशेष वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत धार्मिक, औषधीय और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण माने जाने वाले पीपल, प्राचीन बरगद, प्राकृतिक एंटीसेप्टिक नीम, मीठे आम और विटामिन-सी से भरपूर आंवला सहित कई विशिष्ट छायादार एवं फलदार पौधों का विधिवत रोपण किया गया। इस अवसर पर सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने देवभूमि की इस महान प्रकृतिवादी परंपरा को जीवंत रखने और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए सामूहिक रूप से संकल्प लिया. जवानों ने संकल्प जताया कि वे अपने व्यस्त पुलिसिंग ड्यूटी के बीच से समय निकालकर इन रोपे गए पौधों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रबंध सुनिश्चित करेंगे, ताकि ये पौधे भविष्य में विशाल वृक्ष का आकार ले सकें।

प्रभारी निरीक्षक सुंदरम शर्मा ने पर्यावरण चेतना पर विशेष बल दिया. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वृक्षारोपण का वास्तविक महत्व केवल फोटो खिंचवाने या पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन पौधों की जीवन रक्षा, उनकी नियमित सिंचाई और उनका पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित करना ही इस अभियान की वास्तविक सफलता है. उन्होंने सितारगंज क्षेत्र की समस्त जागरूक जनता, युवा संगठनों और स्कूली बच्चों से भी भावुक अपील की कि वे इस मानसून के सीजन में प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए अपने घरों व आसपास के खाली स्थानों पर अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाएं और उनकी सुरक्षा की व्यक्तिगत जवाबदेही सुनिश्चित करें ताकि आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त वातावरण मिल सके।

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