सितारगंज (ऊधम सिंह नगर)। अखिल भारतीय किसान सभा ने सरकार की नीतियों और चीनी मिल प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है। सोमवार को नई मंडी परिसर में जिलाध्यक्ष गुरनाम सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगों को अनसुना किया गया, तो वे बड़ा जनांदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
चीनी मिल और बैंकों पर गंभीर आरोप
बैठक में किसानों ने सितारगंज चीनी मिल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मिल प्रबंधन नियमों को ताक पर रखकर बाहरी क्षेत्रों से गन्ना खरीद रहा है, जो स्थानीय गन्ना समिति के अधिनियमों का खुला उल्लंघन है। किसानों ने कहा कि एक ओर सरकार 24 घंटे में भुगतान का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर किसान अपने ही पैसों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने मांग की कि भुगतान में देरी करने वाले बैंकों के साथ तत्काल अनुबंध (Contract) समाप्त किया जाए।
धान खरीद में ‘लूट’ पर फूटा गुस्सा
सरकार की धान खरीद नीति पर रोष व्यक्त करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि कच्चे आढ़तियों ने किसानों के साथ जमकर मनमर्जी और लूट-खसोट की है। किसानों ने मांग रखी कि:
- आगामी गेहूं खरीद (2025-26): पूरी खरीद बहुउद्देशीय किसान सेवा सहकारी समिति के माध्यम से ही हो।
- पट्टा बहाली: शक्तिफार्म में निरस्त किए गए कृषि पट्टों को बहाल कर किसानों को मालिकाना हक दिया जाए।
- भूमिधरी अधिकार: काबिज भूमि पर बसे लोगों को तत्काल भूमिधरी अधिकार मिले।
विदेशी आयात से बर्बादी का डर
अखिल भारतीय किसान सभा ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि अमेरिका के लिए भारतीय बाजार खोलने से उत्तराखंड के छोटे किसान और फल उत्पादक पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने सहकारी चीनी मिलों में लंबे समय से लंबित बोर्ड के गठन की भी तत्काल मांग की।
चेतावनी- किसान इन नीतियों के खिलाफ बड़ा जनांदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा। जल्द ही, किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से मिलने का निर्णय लिया गया। वहां किसान सभा के महामंत्री मनसुखी राणा, अनिरुद्ध राय, डॉ. जगदीप सिंह, राजेंद्र सिंह, लखविंदर सिंह विर्क, परितोष मंडल, रंजीत, नत्थू लाल, सतनाम सिंह सहित अन्य किसान उपस्थित रहें।