सितारगंज (उधम सिंह नगर)। ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान को गति देने के उद्देश्य से मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने केंद्रीय कारागार, सितारगंज में एक विशेष टीबी स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. के.के. अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में जेल के सैकड़ों बंदियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया।

372 बंदियों की हुई जांच, 14 मिले संदिग्ध
सेंट्रल टीबी डिवीजन के निर्देशों पर आयोजित इस शिविर में कुल 372 बंदियों की प्रारंभिक टीबी स्क्रीनिंग की गई। गहन परीक्षण के बाद 14 कैदियों में टीबी के संदिग्ध लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य टीम ने तत्काल इन सभी संदिग्धों के बलगम व अन्य आवश्यक सैंपल एकत्रित किए, जिन्हें विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला (लैब) भेज दिया गया है।

जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार
शिविर के दौरान बंदियों को संबोधित करते हुए CMO डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि जेल जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले वातावरण में संक्रामक रोगों का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने बंदियों को टीबी के लक्षण, बचाव के उपाय और नियमित इलाज के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समय पर बीमारी की पहचान हो जाए और पूरा कोर्स लिया जाए, तो टीबी को पूरी तरह जड़ से खत्म किया जा सकता है।

ये रहे उपस्थित
इस विशेष स्वास्थ्य शिविर में जिला पीएमडीटी समन्वयक नवल, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक सुनील राय के साथ डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. कविश अहमद, डॉ. शिवांगी व्यास और डॉ. सुनीता साना सहित कई अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।


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