अमरिया। PILIBHIT जनपद की अमरिया पुलिस ने रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। सहायक पुलिस अधीक्षक नताशा गोयल ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मास्टरमाइंड शिवशंकर मिश्रा को पुलिस ने धर दबोचा है, जो अब तक अपने परिवार और सहयोगियों के साथ मिलकर करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी कर चुका है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस अब तक कुल सात अभियुक्तों को जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
​ऐसे हुआ करोड़ों के खेल का पर्दाफाश
​धोखाधड़ी के इस खेल की शुरुआत ग्राम भूड़ा निवासी राजकुमार की शिकायत से हुई, जिन्होंने 16 सितंबर को पांच अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने जब मामले की परतें खोलनी शुरू कीं, तो ठगी का दायरा बढ़ता ही गया। शुरुआती जांच के बाद 1 फरवरी 2026 को कमलेश कुमार, मोहम्मद मोहसिन, शोएब, रामा यादव, रेखा मिश्रा और धनंजय मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई के बाद 23 अन्य पीड़ित भी सामने आए, जिन्होंने करीब 2.98 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धोखाधड़ी की बात कही। सघन पूछताछ में मुख्य अभियुक्त शिवशंकर मिश्रा ने कबूला कि वर्ष 2021 से वह अपनी पत्नी रेखा, पुत्र धनंजय, पुत्री आयुषी और अन्य साथियों के साथ मिलकर 60 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

​फर्जी अधिकारी और किश्तों में ‘सैलरी’ का झांसा

​गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। मूल रूप से गुजरात के अंकलेश्वर का निवासी शिवशंकर मिश्रा भोले-भाले ग्रामीणों को अपनी बेटी आयुषी के रेलवे जॉब के फर्जी दस्तावेज दिखाकर विश्वास में लेता था। गिरोह में ‘आरके सिंह’ नाम का एक फर्जी रेल अधिकारी भी शामिल था, जो पीड़ितों को झांसा देने के लिए कभी-कभी उनके बैंक खातों में छोटी रकम डालता था, जिसे पीड़ित अपनी पहली ‘सैलरी’ समझ लेते थे। इस विश्वास के दम पर गिरोह पीड़ितों से लाखों रुपये ऐंठ लेता था। ठगी की रकम के लेन-देन के लिए विभिन्न बैंकों में 14 फर्जी खाते खोले गए थे, जिन्हें पुलिस ने अब सीज कर दिया है।

​पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

​सहायक पुलिस अधीक्षक नताशा गोयल ने बताया कि पुलिस ने इस अंतर्राज्यीय गिरोह के पास से अब तक 2 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। गिरोह मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के उन युवाओं को निशाना बनाता था जो सरकारी नौकरी की तलाश में रहते थे। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से क्षेत्र के उन दर्जनों पीड़ितों को राहत मिली है जो अपनी जमा-पूंजी गंवा चुके थे। पुलिस अब इस मामले में फरार अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है और यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह के तार अन्य किन राज्यों से जुड़े हैं।

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