परभणी। महाराष्ट्र के परभणी जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ मानवत तहसील के यशवाड़ी गांव में स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। मंदिर के निर्माणाधीन सभा मंडप की भारी-भरकम छत (स्लैब) अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। इस भीषण दुर्घटना में कम से कम 5 श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि 18 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
शनिवार के कारण मंदिर में थी भारी भीड़
स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार का दिन होने की वजह से मारुति (हनुमान) मंदिर में दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु जुटे हुए थे। दोपहर करीब 3:30 बजे, जब कई लोग मंदिर परिसर में मौजूद थे, तभी निर्माणाधीन ‘सभा मंडप’ (असेम्बली हॉल) को सहारा देने वाले पिलर अचानक ढह गए। पिलर टूटते ही पूरी कंक्रीट की छत नीचे खड़े श्रद्धालुओं पर आ गिरी, जिससे चीख-पुकार मच गई।
मलबे से निकाले गए 25 से ज्यादा लोग, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, पुलिस प्रशासन और एम्बुलेंस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
अब तक मलबे से लगभग 25 से 27 लोगों को सुरक्षित या घायल अवस्था में बाहर निकाला जा चुका है। मलबे में दबे सभी घायलों को तुरंत नजदीकी जिला सामान्य अस्पताल और आरपी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।
सरकार ने किया 5-5 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान
इस भीषण त्रासदी पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सरकार ने मृतकों के पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ₹5-5 लाख की आर्थिक सहायता (अनुग्रह राशि) देने की घोषणा की है। इसके साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी घायलों का मुफ्त और सर्वोत्तम इलाज सुनिश्चित किया जाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परभणी में हुए इस हादसे पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों के साथ उनकी गहरी संवेदनाएं हैं और वे घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। स्थानीय प्रशासन दुर्घटना के कारणों की जांच में जुट गया है कि आखिर निर्माण कार्य में क्या लापरवाही बरती गई थी।