विधि संवाददाता, ​पीलीभीत। सत्र न्यायालय में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत, विवाहिता की हत्या के दोषी पति को सात वर्ष की सजा और जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जनपथ सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर रविशंकर ओझा को अपनी पत्नी आकांक्षा की हत्या का दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोषी को सात वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। फैसले में यह भी निर्देश दिया गया है कि अर्थदंड के रूप में जमा होने वाली धनराशि में से आधी राशि मृतका के निकटतम उत्तराधिकारी (वादी) को विधिक प्रक्रिया के तहत प्रदान की जाएगी। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में मृतका के ससुर बाबूराम ओझा के विरुद्ध आरोप सिद्ध न होने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।
​मामले की पृष्ठभूमि थाना बरखेड़ा के ग्राम मधुपुरी निवासी साकेत कुमार पांडेय की तहरीर पर आधारित है, जिन्होंने थाना पूरनपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वादी के अनुसार, उनकी पुत्री आकांक्षा का विवाह 13 महीने पूर्व मोहल्ला साहूकारा लाइन पार, पूरनपुर निवासी रविशंकर ओझा के साथ हुआ था। आरोप था कि रविशंकर ओझा ने आकांक्षा से पहले आरती देवी से शादी की थी और वह उसे घर में रखने को लेकर अक्सर आकांक्षा के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करता था। आकांक्षा को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था और अक्सर उसे मायके जाने का दबाव बनाया जाता था। 13 मई 2020 को आकांक्षा की संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने विवेचना के उपरांत रविशंकर ओझा और बाबूराम ओझा के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र पाल गंगवार ने वादी सहित कई गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके बाद न्यायाधीश ने पति रविशंकर ओझा को दोषी पाते हुए यह फैसला सुनाया।

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