​पीलीभीत। केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया और निर्बाध गैस आपूर्ति के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जिले में पिछले कुछ समय से गैस बुकिंग की प्रक्रिया पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे आम जनमानस को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों द्वारा बुकिंग के लिए उपलब्ध कराए गए टेलीफोन नंबर और ऑनलाइन सिस्टम शोपीस बनकर रह गए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस पासबुक में दर्ज आधिकारिक बुकिंग नंबर (9412623456) सहित अन्य हेल्पलाइन नंबर या तो लग नहीं रहे हैं या उन्हें सिस्टम स्तर से बंद कर दिया गया है।
​गैस बुकिंग न होने के कारण उपभोक्ता मजबूरी में सीधे गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिल रही है। स्थानीय एजेंसी कार्यालयों पर स्थिति यह है कि पूरा परिसर उपभोक्ताओं की भीड़ से खचाखच भरा हुआ है। वहां तैनात कर्मचारी और अधिकारी केवल एक ही रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं कि ‘सर्वर पूरी तरह खराब है’। सर्वर डाउन होने के कारण ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही माध्यमों से बुकिंग ठप है, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को बिना काम कराए ही मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
​इस अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के नगर अध्यक्ष शैली शर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा व्यवस्था दुरुस्त होने के तमाम दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि तकनीकी विफलता के कारण जनता को जो मानसिक और शारीरिक परेशानी हो रही है, उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। शैली शर्मा ने जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि बुकिंग सिस्टम को सुचारू कर आम जनता को इस किल्लत और दफ्तरों की भीड़ से निजात दिलाई जा सके।
​गैस की किल्लत न होने के सरकारी दावों के बावजूद, बुकिंग की इस तकनीकी विफलता ने जनता के बीच निराशा और आक्रोश पैदा कर दिया है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी बुकिंग न होने से लोग सवाल उठा रहे हैं कि इस अव्यवस्था और सिस्टम की विफलता का जवाबदेह कौन है। जहां एक ओर सरकार घर बैठे सुविधाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक अदद गैस सिलेंडर बुक कराने के लिए उपभोक्ताओं को दफ्तरों की भीड़ और अव्यवस्था के बीच धक्के खाने पड़ रहे हैं।

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