पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ एक बाघिन जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जंगल के भीतर अपना इलाका और वर्चस्व कायम करने को लेकर बाघों के बीच भीषण आपसी संघर्ष हुआ था। इस खूनी भिड़ंत में बाघिन बुरी तरह जख्मी हो गई और लहूलुहान अवस्था में जंगल के भीतर पड़ी मिली।
अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई और टीम का गठन
बाघिन के घायल होने की खबर फैलते ही टाइगर रिजर्व प्रशासन हरकत में आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक पीपी सिंह ने बिना किसी देरी के त्वरित कदम उठाए। उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यों की एक विशेष टीम का गठन किया और उन्हें तत्काल मौके पर पहुँचकर प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के कड़े निर्देश दिए।
सुरक्षित रेस्क्यू और इलाज प्रक्रिया
क्षेत्र निदेशक के निर्देश मिलते ही वन्यजीव विशेषज्ञों, डॉक्टरों और वन विभाग के कर्मचारियों की संयुक्त टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुँची। टीम ने कुशलतापूर्वक और सतर्कता बरतते हुए घायल बाघिन का रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के उपरांत बाघिन को एक सुरक्षित व एकांत स्थान पर लाया गया, जहाँ पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसका तत्काल गहन इलाज शुरू कर दिया गया है। वन कर्मियों और डॉक्टरों की टीम पल-पल उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रही है।
वनाधिकारी का वक्तव्य और उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट
इस पूरे रेस्क्यू और मेडिकल ऑपरेशन पर बात करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने कहा, “बाघिन को बचाने के लिए वन विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम हर संभव प्रयास कर रही है। विशेषज्ञ लगातार उसकी सेहत का जायजा ले रहे हैं और आवश्यक दवाइयाँ दी जा रही हैं।”
इसके साथ ही, प्रशासनिक स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रधान वन संरक्षक सुनील चौधरी और प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा बैमूरी को प्रेषित कर दी गई है, ताकि उच्च स्तर पर भी स्थिति की मॉनिटरिंग की जा सके।